
कवर्धा. नाबालिग को बहला-फुसलाकर दुष्कर्म करने के एक मामले में जेल में बंद आरोपी को कोर्ट ने 10 वर्ष की सजा सुनाई है। आपको बतादें कि नाबालिग दर्जी के पास कपड़ा सिलाई कराने गई थी। वहीं, जब वह वापस लौटी तो परिजनों को दुष्कर्म के बारे में बताया। जिसके बाद परिजनों ने थाने में रेप की शिकायत दर्ज कराई थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को 10 साल सश्रम कारावास आर्थिक दण्ड लगाया है। जानिए पूरा मामला..
बालिका दुष्कर्म करने के मामले में आरोप सिद्ध होने पर न्यायाधीश विनीता वार्नर ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को 10 वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही 5 हजार रूपए का अर्थ दण्ड भी लगाया है। न्यायालय से मिली जानकारी के अनुसार नाबालिग बालिका 30 मार्च 2017 सुबह 10 बजे कपड़ा सिलाई कराने दर्जी के घर गई थी, जो देर शाम तक वापस नहीं नहीं लौटी। शाम को जब उसकी मां रोजी मजदूरी कर घर आई तो देखा कि उसकी बेटी घर पर नहीं थी। पड़ोस में पता-साजी की तो कोई जानकारी नहीं मिली।
इसके बाद युवक को शंका के आधार पर फेंगर सावरा के विरूद्ध बहला-फुसला कर भगाकर ले जाने कि रिपोर्ट कवर्धा थाने में दर्ज कराई। जहां धारा 362 का मामला दर्ज किया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। जिसमें उनसे अपना जुर्म कबूल किया।
डॉक्टरी मुलाहिजा के बाद भारतीय दण्ड विधान की धारा 363, 366, 376 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 03, 04 के अंतर्गत न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। गवाहों से पूछताछ के बाद न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए आरोपी सुनील उर्फ फेंगर सौरा पिता दूसरी सौरा(19) को धारा 06 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत 10 वर्ष कारवास की सजा सुनाई और पांच हजार रुपए अर्थदण्ड से दण्डित किया।
Published on:
21 Dec 2017 05:03 pm
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