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जिले में 81 करोड़ का बजट, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल 10 लाख रुपए

शहर का विकास केवल निर्माण कार्यों से होता है शायद इसी उद्देश्य को लेकर नगरीय निकाय काम कर रहे हैं

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कवर्धा. शहर का विकास केवल निर्माण कार्यों से होता है। शायद इसी उद्देश्य को लेकर नगरीय निकाय काम कर रहे हैं, जबकि यहां पर्यावरण संरक्षण की कोई चिंता नहीं है। इसके चलते ही कवर्धा की धरती तप रही है। तापमान बढ़ रहा है।

जी हां, यह इसलिए कहना पड़ रहा है कि क्योंकि शहर में पानी की समस्या गहराने लगी है। भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। हरियाली कम होते जा रहा है। वहीं दूसरी ओर नगर पालिका के जनप्रतिनिधि और अधिकारी केवल निर्माण कार्य और राजस्व वसूली पर ध्यान दे रहे हैं। तभी तो 81 करोड़ के बजट में पौधरोपण पर 5 लाख और वर्षा जल संरक्षण पर केवल ५ लाख रुपए का प्रावधान रखा गया है।

जबकि इसके लिए एक प्रभावी कार्य योजना तैयार करने की आवश्कता है, ताकि शहर में चारों ओर हरियाली ही हरियाली नजर आए और व्यर्थ बहने वाला पानी सीधे धरती में समाए। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि शहर की स्थिति तेजी से बदल रही है। गली-गली, नाली-नाली क्रांकीटीकरण होने के कारण पानी जमीन के भीतर नहीं पहुंच पा रहा है। गर्म कांक्रीटीकरण में पानी केवल भाप बनकर उड़ रहा है, जो बहुत ही बड़ा चिंता का विषय है।

30 व 31 मार्च को शहर का अधिकतम तापमान 40 व 41 डिग्री था। यह तापमान मुख्यत: मई में नवतपे के समय होता था, लेकिन इस बार दो माह पूर्व ही आ गया। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आगे तापमान की स्थिति क्या होगी। इसके लिए सबसे बेहतर उपाय पेड़-पौधे की हरियाली ही हैं। जितनी अधिक हरियाली रहेगी, शहर का तापमान उतना ही कम रहेगा। पेड़-पौधों के कारण भू-जल स्तर भी संतुलित रहेगा।

नगर पालिका द्वारा पिछले वर्ष कुछ स्थानों पर पौधरोपण किया गया। इसी तरह शहर के प्रत्येक खाली पड़े स्थानों पर जहां आज फूटपाथ (पीपीसी ब्लॉक) बनाया जा रहा है वहां पर भी पौधरोपण होना चाहिए, सुरक्षा के साथ। वहीं शासकीय कार्यालय, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल परिसर में पौधरोपण नहीं वृक्षारोपण की आवश्यकता है। अन्य शहरों से पेड़ खरीदे जाए और उन्हें लगाए जाए, जैसा रेवाबंद सरोवर उद्यान निर्माण के दौरान किया गया था।

वॉटल लेबल को रिचार्ज करने के लिए वॉटर हॉर्वेस्टिंग बहुत ही कारगर है। प्रत्येक कार्यालय भवन व निजी भवन लगाना चाहिए, ताकि बारिश का पानी नालियों में बहकर बर्बाद न हो। वॉटर हॉर्वेस्टिंग बारिश के पानी को सीधे जमीन के भीतर पहुंचाता। यह भू-जल स्तर बढ़ाने का सबसे बेहतर उपाय है। नगर पालिका द्वारा इसके लिए ५ लाख रुपए प्रावधान किए हैं, जबकि इसके लिए राशि बढ़ाने की आवश्यकता है।

सभी लें जिम्मेदारी

बजट प्रस्तुतिकरण के दौरान सांसद प्रतिनिधि जसविंदर बग्गा ने शहर की खत्म होती हरियाली पर चिंता व्यक्त की। साथ ही उन्होंने हरियाली के लिए ग्रीन कवर्धा नीम कवर्धा अभियान चलाने की बात कही। एक व्यक्ति घर, ऑफिस या गोदाम के आसपास सिर्फ एक नीम का पौधा लगाएं और उसकी स्वयं देखरेख करें। यह काफी प्रभावी कदम हो सकता है। नीम इसलिए क्योंकि यह छायादार होता है। मवेशी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते, साथ ही यह औषधियुक्त पेड़ है।

नगर पालिका परिषद कवर्धा के सीएमओ सुनील अग्रहरि ने बताया कि पिछले वर्ष हमने कई स्थानों पौधरोपण कराकर तार फेंसिंग कराए। मार्केट लाइन में दुकानों के सामने पौधे लगाए गए, जहां सुरक्षाघेरा भी लगवाए। इस वर्ष भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम किया जाएगा।