26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अगर आपके घर पर भी हैं किराएदार और नौकर तो तुरंत करें ये काम, वरना भुगतना होगा अंजाम

वेरीफिकेशन कराने को लेकर सजग नहीं मकान मालिक, क्राइम को दे रहे बढ़ावा

2 min read
Google source verification
chhattisgarh news

अगर आपके घर पर भी हैं किराएदार और नौकर तो तुरंत करें ये काम, वरना भुगतना होगा अंजाम

कवर्धा . कबीरधाम जिले के विभिन्न शहरी इलाकों में कई लोग किराए पर रह रहे हैं, जिनसे पुलिस बेखबर है। कारण कि मकान मालिक न तो इन किराएदारों का वेरीफिकेशन कराने में दिलचस्पी ले रहे हैं और न ही पुलिस। किराएदारों का वेरीफिकेशन न कराकर मकान मालिक खुद तो अपराध कर ही रहे हैं। वहीं जिला पुलिस भी अपने लिए ही मुसीबत खड़े कर रही है।

शहर सहित जिलेभर में कई ऐसे लोग हैं, जो कमाई की जुगत में अपना मकान किराए पर देते हैं। 45 हजार से ज्यादा आबादी वाले कवर्धा शहर में ही कई मोहल्लों में लोगों को रहने के लिए किराए पर मकान दिया जाता है। किंतु मकान मालिक द्वारा इन किराएदारों की पूरी तस्दीक नहीं की जाती है। किराएदार रखने के पहले संबंधित थानों में उनका वेरीफिकेशन भी नहीं कराया जाता है। जिसके चलते अपराधों की जड़ें मजबूत हो रही है। जिले में चोरी और लूट की वारदातों के बाद एक बार फिर से शहर में तहकीकात की जरूरत महसूस होने लगी है। बावजूद इसके पुलिस विभाग द्वारा किराएदार और नौकरों की सूची अपडेट नहीं की जा रही है।

न सिर्फ मकान मालिक बल्कि वाहन संचालकों द्वारा भी लापरवाही बरती जा रही है। शहर में अधिकांश ट्रक, बस और टैक्सी चलाने वाले ड्राईवर बाहरी हैं। वाहन मालिकों द्वारा केवल लाइसेंस देखकर उन्हें नौकरी पर रख लिया जाता है। जबकि थाने में इसकी सूचना नहीं दी जाती है। यदि ऐसे में कोई अपराध होता है, तो पुलिस केवल हवा में हाथ-पैर मारते रह जाती है और अपराधी गुमनामी का चादर ओढक़र बच निकलता है।

किराएदारों और नौकरों का वेरीफिकेशन को लेकर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। किराएदारों का सिर्फ नाम-पता नोट कर मकान किराए पर दे दिया जाता है। ड्राईवर रखने के पहले वाहन संचालक भी कुछ ऐसा ही करते हैं। बाद में जब वे मुसीबत में पड़ जाते हैं, तो थाने में गिड़गिड़ाने पहुंच जाते हैं। हैरत की बात है कि पुलिस भी खुद किराएदारों और बाहरी ड्राईवर के वेरीफिकेशन को लेकर जमीनी स्तर पर फुर्ती नहीं दिखाती।

लोग यदि अपने किराएदारों और नौकरों की जानकारी थाने में दर्ज नहीं कराते, तो दो तरह के नुकसान हो सकते हैं। पहले वे पुलिस के सर्कुलर का उल्लंघन कर आईपीसी की धारा 188 के अपराधी बनते हैं। दूसरा यदि उनके किराएदार या नौकर कोई अपराध करता है, तो मकान मालिक पर जानकारी छिपाने और अपराधी को पनाह देने का मामला भी बन सकता है।

कबीरधाम के एएसपी अंनत कुमार ने कहा कि समय समय पर किरायदारों की सूची मकान मालिकों से मंगाई जाती है। जब तक मकान मालिक जागरुक नहीं होंगे, तब तक जानकारी इकट्ठा नहीं किया जा सकता। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। पुलिस थानों के प्रभारियों को भी जानकारी इकट्ठा करने कहा जाएगा।