
आदिवासियों को थमाए फर्जी वन पट्टे (photo source- Patrika)
Chhattisgarh News: कबीरधाम जिले का रेंगाखार वन परिक्षेत्र एक बार फिर फर्जी वन अधिकार पत्र (वन पट्टा) घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। बेखबर आदिवासी परिवारों को वैध पट्टा दिलाने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपए ऐंठ लिए गए और फर्जी दस्तावेज थमा दिए गए। पीड़ितां ने इसके लिए धान बेचा और महिलाओं ने अपने जेवर तक गिरवी रखकर या बेचकर 50-50 हजार रुपये जुटाए थे।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब पीड़ित ग्रामीण समनापुर सेवा सहकारी समिति में खाद लेने और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनवाने पहुंचे। वहां दस्तावेजों की जांच के दौरान वन पट्टे संदिग्ध पाए गए। जब इनका सत्यापन कराया गया, तो सभी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी निकले। ठगी का अहसास होते ही पीड़ितों ने रेंगाखार वन परिक्षेत्र कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और जांच की मांग की।
पीड़ितों के अनुसार, पट्टा जारी करने के लिए अनिवार्य ग्रामसभा या ग्राम पंचायत का कोई प्रस्ताव नहीं लिया गया। न ही वन विभाग की ओर से कोई मौका जांच हुई। आरोप है कि गांव का ही एक व्यक्ति सीधे उनके घर पहुंचा और फर्जी पट्टे सौंप गया। ग्रामीणों ने ग्राम अंजना निवासी राजेंद्र सिंह धुर्वे पर इस ठगी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी खुद भी वन भूमि पर अवैध कब्जा किए हुए है। उनका दावा है कि इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कोई व्यक्ति अकेले नहीं कर सकता, इसके पीछे पूरा नेटवर्क सक्रिय है।
रेंगाखार क्षेत्र में यह कोई पहला मामला नहीं है। करीब दो साल पहले भी सैकड़ों फर्जी पट्टे जारी होने का मामला सामने आया था। हालांकि, उस समय शुरू हुई जांच आज तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
फर्जी वन अधिकार पत्रों के संबंध में शिकायत मिली है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी-आशीष कंसारी (थाना प्रभारी, झलमला)
ग्रामीणों ने जांच के लिए पांच संदिग्ध पट्टे जमा कराए हैं, जिन्हें सत्यापन के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। लोग ऐसे फर्जी पट्टों की जानकारी तुरंत विभाग को दें-लक्ष्मीकांत बंजारा (वन परिक्षेत्र अधिकारी, रेंगाखार)
Updated on:
22 Jul 2026 09:39 am
Published on:
22 Jul 2026 09:38 am
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