
छतरपुर। पर्यटकों को हजारों वर्ष पुरानी जनजातीय सभ्यता और संस्कृति से रूबरू कराने के लिए खजुराहो में जनजातीय लोककला संग्रहालय (आदिवर्त) बनकर तैयार हो गया है। इसमें 7 जनजातियों की एक बस्ती बसाई गई है। जिसे देख देशी-विदेशी पर्यटक मध्यप्रदेश की संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे। 20 फरवरी को इसका लोकार्पण होने वाला है।
देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां जनजातीय सभ्यता, संस्कृति, परम्पराओं, आभूषण कला से परिचित हो सकेंगे। इन बस्तियों के माध्यम से जंगल के अंदर और पहाड़ों पर रहने वाले जनजातीय समाज के रहन-सहन, खान-पान, वेशभूषा, आभूषण का एक जगह संगम किया गया है। जिससे खजुराहो आने वाले दुनियाभर के पर्यटकों को इनकी दुनिया से परिचित कराया जाए। जनजाति बस्ती का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 20 फरवरी को लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही हेरिटेज पाठशाला का भी लोकार्पण होगा।
आदिवर्त जनजातीय बस्ती के प्रभारी अशोक मिश्रा ने बताया मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरुप बस्ती तैयार हो गई है। बस्ती में आदिवासी परिवार भी रहने लगे हैं। विदेशी पर्यटकों को मध्यप्रदेश की हजारों वर्ष पुरानी जनजातीय सभ्यता और संस्कृति से रूबरू कराने के लिए खजुराहो में संस्कृति विभाग द्वारा जनजातीय आवास बनाए गए हैं। मप्र संस्कृति विभाग के जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी भोपाल द्वारा इस जनजातीय गांव को बसाया गया है। आदिवर्त जनजातीय लोक कला संग्रहालय के परिसर से लगी लगभग 4 एकड़ जमीन पर आवास बनाए गए हैं। संग्रहालय में प्रदेश की 7 प्रमुख जनजाति गोंड, बैगा, कोरकू, भील, भारिया, सहरिया और कोल के पारंपरिक जनजातीय आवासों का संयोजन किया जा रहा है। इन आवासों में जनजातियों की जीवन शैली एवं उनकी पारंपरिक उपयोगी सामग्रियों का प्रदर्शन किया गया है।
प्रदेश के पांचों लोकांचल बुंदेलखंड, निमाड़, मालवा, बघेलखंड और चंबल की संस्कृति के पारंपरिक आवासों का निर्माण किया जा रहा है। एक-एक आदर्श आवास के जरिए संग्रहालय में प्राचीन सभ्यता को मूल स्वरूप में देखा जा सकेगा। इसके साथ ही विभिन्न जनजातियों द्वारा बनाई गई हस्तशिल्प से भी रुबरु हो सकेंगे। ग्रामीण और जनजातीय जीवन, उनके देवी-देवता और उनके चिह्नों को भी इस परिसर में निर्मित किया जा रहा है। साथ ही पहले से स्थापित संग्रहालय की पूरी आंतरिक साज-सज्जा नए सिरे से की जा रही है।
हेरिटेज पर्यटन की होगी पढ़ाई
खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध पश्चिमी समूह के मंदिरों में लक्ष्मण मंदिर के पीछे हेरिटेज पाठशाला का निर्माण किया गया है। इस पाठशाला में विषय विशेषज्ञ हेरिटेज टूरिज्म की पढ़ाई कराएंगे। इस पाठशाला में स्थानीय व बाहरी युवाओं को हेरिटेज पर्यटन को समझने का अवसर मिलेगा।
कलाकृतियों की लगाएंगे प्रदर्शनी
आदिवर्त बस्ती में एक प्रदर्शनी कक्ष का भी निर्माण किया है। इसमें जनजाति कलाकारों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों, चित्रों की प्रदर्शनी लगायी जाएगी। इन कलाकृतियों और चित्रों का प्रदर्शन यह आदिवासी कलाकार खुद करेंगे एवं उनका विक्रय भी खुद करेंगे। जिन्हें देखने और खरीदने पर्यटक आएंगे।
लक्ष्मण मंदिर के पीछे हेरिटेज पाठशाला बनाई गई है। पाठशाला का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह 20 फरवरी को उद्धाटन करेंगे। पाठशाला में हेरिटेज पर्यटन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-शिवकांत वाजपेयी, अधीक्षक, पुरात्तव विभाग
Updated on:
13 Feb 2023 05:37 pm
Published on:
13 Feb 2023 05:36 pm
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