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एमपी के इस 1300 साल पुराने मंदिर का होगा रेनोवेशन, गिरते पत्थरों को रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी

Archaeological Department: मध्य प्रदेश की पर्यटन नगरी खजुराहो में स्थित लगभग 1300 साल पुराने मंदिर का जबलपुर पुरातत्व विभाग जीर्णोद्धार करने वाला है।

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Chausath Yogini temple of khajuraho will be renovated by Jabalpur Archaeological Department mp

Archaeological Department: मध्य प्रदेश के खजुराहो का ऐतिहासिक चौंसठ योगिनी मंदिर अब अपने पुराने गौरव के साथ पुनर्निर्मित किया जाएगा। चंदेलकालीन इस मंदिर की प्राचीनता और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए जबलपुर पुरातत्व विभाग ने इसके संरक्षण का बीड़ा उठाया है। मंदिर के पत्थर धीरे-धीरे खिसकने लगे थे, जिससे इसकी संरचना संकट में आ गई थी। अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. शिवकांत वाजपेयी ने बताया कि मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य तेज़ी से चल रहा है। मंदिर के पत्थरों की नंबरिंग कर उन्हें वापस उन्हीं स्थानों पर स्थापित किया जा रहा है। दरारों को भरने के लिए प्राचीन तकनीक से लाइम मोर्टर का उपयोग किया जा रहा है, जिससे इसकी मजबूती बनी रहेगी।

आठवीं शताब्दी का है चौंसठ योगिनी मंदिर

आठवीं शताब्दी में चंदेल शासकों द्वारा ग्रेनाइट पत्थरों से किया गया था। यह मंदिर तांत्रिक विद्या का प्रमुख केंद्र रहा है, जिसमें चौंसठ योगिनियों की छोटी-छोटी मढ़ियां स्थित हैं। यह भारत के चौंसठ योगिनी मंदिरों में से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

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मातृ देवियों की मूर्तियां संग्रहालय में सुरक्षित

मंदिर के खंडहरों में मातृ देवी या मातृकाओं की तीन बड़ी मूर्तियां प्राप्त हुई थीं, जिन्हें अब खजुराहो संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। इन देवियों में ब्राह्मणी, माहेश्वरी और हिंगलाज (महिषमर्दिनी) की प्रतिमाएं शामिल हैं। ब्राह्मणी की छवि में तीन चेहरे और उसका वाहन हंस दर्शाया गया है, जबकि माहेश्वरी को त्रिशूल और कूबड़ वाले बैल के साथ दिखाया गया है। महिषमर्दिनी की मूर्ति में वह भैंसे पर आसीन दिखाई देती हैं।

विश्व धरोहर में शामिल होने का प्रस्ताव

खजुराहो का यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के चलते यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल होने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इसके जीर्णोद्धार के बाद इसे फिर से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा।पुरातत्व विभाग की इस पहल से न केवल इस प्राचीन धरोहर को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी ऐतिहासिक प्रेरणा स्रोत बना रहेगा। मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद खजुराहो के पर्यटन को भी नई ऊंचाइयां मिलेंगी।