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खजुराहो। विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो में 9 वीं से 11वीं शताब्दी में निर्मित चन्देल कालीन मंदिरों के बाहरी आवरण में कामकला की मूर्तियां स्थापित हैं तो वहीं गर्भग्रह में हिन्दू देवताओं के स्वरुप विराजित हैं। वैसे तो खजुराहो में चारों तरफ कई मंदिर बने हैं लेकिन पश्चिमी मंदिर समूह सबसे बड़ा और प्रमुख समूह है। इस समूह के अंदर भव्य शिल्पकला के 12 दर्शनीय मंदिर बने हैं,जिनमें से अधिकतर भगवान शिव तथा विष्णु के स्वरूपों को समर्पित हैं। इतिहासकारों की माने तो ऐंसी मान्यता बताई गई है कि जब तक देवों के साथ शक्ति का स्वरूप साथ न हो तो उसे अपूर्ण माना जाता है इसलिए तत्समय ही समूह के मंदिरों में से एक मंदिर देवी पार्वती को समर्पित किया गया है।
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बताया जाता है कि इसके लिए कन्दारिया महादेव मंदिर के बीच में स्थापित मंदिर का गर्भगृह खाली था जिसमें सन 1880 के समय तत्कालीन महाराजा छतरपुर ने खजुराहो से लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित मनियागढ़ की पहाड़ी के जंगल से प्राचीन देवी पार्वती की अदभुत प्रतिमा लाकर स्थापित करवा दी, जिसके पीछे तर्क दिया गया कि अब श्रष्टि परिपूर्ण होगी। साथ ही शिव के साथ पार्वती मां का सभी को आर्शीवाद मिलेगा।
कालांतर में पार्वती देवी के मंदिर को देवी जगदम्बी का स्वरुप माना गया। तभी से उक्त मंदिर को देवी जगदम्बी मंदिर के रूप में जाना जाने लगा और देवी भक्तों ने चैत्र तथा आश्विन मास के नवरात्रि पर्व पर देवी जलार्पण एवं पूजन किया जाने लगा, जो आज भी अनवरत जारी है। हालांकि खजुराहो का पश्चिमी मंदिर समूह भारतीय पुरात्तव विभाग के अधीन हैं और यूनिस्को की गाइड लाइन प्रभावी है साथ ही सभी मंदिरों के गर्भगृह बंद ही रहते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुरूप चैत्र तथा आश्विन माह की नवरात्रि के नौं दिनों तक देवी पूजन हेतु देवीभक्तों को निशुल्क प्रवेश रहता है साथ ही गर्भगृह के पट खोल दिए जाते हैं। यहां पर बड़ी संख्या में देवी भक्त मां जगदम्बी माता को जल चढ़ा कर देवी उपासना करते हैं। ऐंसी मान्यता है कि इस मंदिर के गर्भगृह में देवी प्रतिमा के सामने आकर मांगी गई मनोकामना एक साल के भीतर पूरी हो ही जाती है। मनोकामना पूरी होने पर अगले वर्ष दर्शन करने आना होता है,यहां पर दूर दूर से आनेवाले देवी भक्त गर्भग्रह खुलने का इंतजार करते हैं। इस वर्ष आश्विन मास में देवी भक्तों को पूजन के लिए जगदम्बी मंदिर का गर्भगृह खुला रहेगा, जहां सूर्योदय के साथ ही देवीभक्त देवी दर्शन के लिए आना शुरू हो जाते हैं,जो सूर्यास्त तक चलता है।
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Updated on:
29 Sept 2022 05:20 pm
Published on:
29 Sept 2022 05:18 pm
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