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हादसा : डीजे की गूंज में डूब गईं चीखें, सहेलियों ने खींचा एक-दूजे का हाथ तो बच गई जान

नवरात्रि के समापन के बाद दशहरा के दिन मूर्ति विसर्जन के दौरान अर्दला डैम में हादसा हो गया। 18 लोग डूबे थे। इसमें 11 की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक को बुरहानपुर रैफर कर दिया। पांच घायल गंभीर रूप घायलों का इलाज चल रहा है।

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खंडवा

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Rajesh Patel

Oct 04, 2025

Accident

हादसा : डीजे की गूंज में डूब गईं चीखें, सहेलियों ने खींचा एक-दूजे का हाथ तो बच गई जान

अर्दला डैम हादसे में आप बीती : अस्पताल में घायलों ने पत्रिका से बयां किया दर्द---

डीजे के शोर के आगे चालक को सुनाई नहीं दिया

आईसीयू में भर्ती मंजुला (17 ) पिता मांगीलाल कक्षा-12 वीं की छात्रा है। हालत में सुधार है। मंजुला ने पत्रिका से चर्चा में हादसे का दर्द बयां किया। ट्रैक्टर-ट्राली में तीन सहेलियां एक साथ सवार थीं। डैम पर ट्रैक्टर पीछे की ओर पानी में जाने लगा। हम तीनों चिल्लाने लगे। डीजे के शोर के आगे चालक को सुनाई नहीं दिया। पानी में डूब गए। घबराहट होने लगी। एक दूसरे को खोजते रहे। तीनों एक दूसरे का हाथ खींचा तो बाहर आ गए।

हादसे का भय अभी भी गूंज रहा

सोनू (16) पिता अवध कहती हैं कि शुक्र है कि मंजुला का हाथ पकड़ में आ गई और मैं बाहर आ गई। मंजुला ने बताया कि सोनू (16) पिता रिथू के पैर पर ट्रैक्ट-ट्राली का पहिया चढ़ गया था। उसे रैफर कर दिया गया। दोनों के सिर व हाथ में खरोंच है। हादसे का भय अभी तक सिर में गूंज रहा है।

तैरना आता है इसलिए बच गई जान

फीमेल वार्ड में भर्ती रश्मि (16) पिता गेंदा और दुर्गा (16) पिता प्यार दोनों कक्षा 11 वीं की छात्रा हैं। दोनों ने बताया कि तैरना जानते थे इस लिए बच गए। मेल वार्ड में भर्ती राजेश (17 ) पिता तेरसी की हालत ठीक है। बेड पर मोबाइल में वीडियो देख रहा था। हादसा पूछने पर एक मिनट के लिए शांत हो गया।

सोनू की हालत गंभीर, इंदौर रैफर किया

आईसीयू में सोनू पिता रिथू की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने इंदौर रैफर कर दिया है। आईसीयू में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बताया कि पैर पर टायर चढ़ने से उठ नहीं रहा था। गंभीर होने पर चिकित्सकों ने इंदौर के लिए रैफर कर दिया है। इंदौर में सोनू का इलाज जारी है।

परिजनों के सवाल..सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए

परिजनों ने व्यवस्था पर सवाल उठाया कि हर साल यहां पर माता की मूर्तियां शांत होने के लिए आस-पास गांव के लोग आते हैं। सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। न कोई रोक-टोक करने वाला था। न ही कोई निगरानी। अगर व्यवस्था होती तो यह हादसा टल सकता था। अस्पताल में भर्ती घायलों ने पत्रिका से बातचीत में दर्द बयां किया, जिसे सुनकर हर कोई भावुक हो गया।

मम्मी की बात मान गए तो यहां नहीं होते

राजेश बोला मम्मी की बात मान गए होते तो यहां नहीं होते। परिजनों ने कहा कि इतना बड़ा मेला लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे और न ही वहां पर कोई रोक-टोक करने वाला था। नहीं तो ये हादसा नहीं होता। जैसा की पत्रिका से बातचीत में घायलों में दर्द बयां किया।