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एक ऐसी अदालतः जहां वर्षों से टूटे परिवार जुड़ते और एक होकर जाते हैं घर

बेटी केलिए एक हुए बिछड़े दंपती, बोले-पौधे की तरह संवारेंगे बेटी का भविष्य नेशनल लोक अदालत में 1029 प्रकरणों में हुआ समझौता

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Agreement in cases in National Lok Adalat in khandwa

Agreement in cases in National Lok Adalat in khandwa

खंडवा. विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत का शुभारंभ सुबह 10.30 बजे जिला एवं सत्र न्यायाधीश एलडी बौरासी ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा लोक अदालत के माध्यम से प्रकरण के पक्षकारों में आपसी कटुता और बुराई समाप्त हो जाती है। साथ ही दोनों पक्षों की जीत होती है। उन्होंने समझौता स्टॉलों का जायजा लिया और पक्षकारों की समस्याओं के निराकरण में सहायता की। कुंटुब न्यायालय में विवाहित जोड़ों के बीच समझौते हुए। इसमें किसी ने बच्चों के भविष्य के लिए अपने गिले-शिकवे भुलाए तो किसी ने मनमुटाव दूर कर एक साथ रहने का संकल्प लिया। सुलह करने वाले दंपतियों को न्यायाधीश ने पौधे भेंट कर जीवन को पौधे की तरह सहेजने का संदेश दिया। लोक अदालत में संगीता पति शिव (30) निवासी डिगरिस और शिव (35) निवासी कालज्याखेड़ी की शादी 14 वर्ष पहले हुई थी। दोनों की एक बेटी भी है। पति द्वारा मारपीट करने और मनमुटाव के चलते संगीता मायके चली गई। लेकिन पति हरकतों से बाज नहीं आया तो अगस्त माह में संगीता ने भरण पोषण का केस न्यायालय में लगाया। यह मामला लोक अदालत में पहुंचा। जहां प्रधान न्यायाधीश आरएस कुशवाह ने दोनों को समझाइश दी और बेटी के भविष्य को संवारने की बात कही। इस पर दोनों साथ रहने के लिए सहमत हुए। सुलह होने पर न्यायालय में संगीता और शिव ने एक-दूसरे को फूलमाला पहनाई। वहीं न्यायाधीश ने पौधा भेंट किया। पति-पत्नी बेटी सोमल्या के साथ खुशी-खुशी घर रवाना हुए। इस दौरान 13 वैवाहिक मामलों में समझौते हुए।

विवाद से परेशान होकर हुए थे अलग
ज्योति बंजारा (20) निवासी रतनपुर और ओमप्रकाश बंजारा (23) निवासी चेनपुर झिरन्या पिछले करीब एक साल से अलग रह रहे थे। ओमप्रकाश जलगांव में निजी होटल में काम करता है। वह शराब पीकर अक्सर पत्नी से विवाद करता था। उसकी हरकतों से परेशान होकर ज्योति मायके आ गई और कोर्ट में केस लगाया। लोक अदालत में काउंसिलिंग के बाद दोनों पुराना विवाद भूलकर एक साथ रहने को राजी हुए। इसी प्रकार रविता और रमजान ने भी अपने मामले में सुलह की।

पक्षकारों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया

इस बार लोक अदालत में पक्षकारों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया। इसमें न्यायाधीश सहित अधिवक्ता, पक्षकार, पुलिसकर्मी और कर्मचारियों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। इस दौरान लोगों को दवाइयों का वितरण भी किया। शिविर में डॉ. सुनील बाजोलिया, डॉ. पंकज जैन, डॉ. महेन्द्र पंवार ने 140 लोगों और आयुष विभाग के डॉ. एसएन वर्मा ने 60 लोगों का होम्योपैथी पद्धति से उपचार किया। लोक अदालत में विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव व न्यायाधीश बीएल प्रजापति, विशेष न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, एडीजे किरणसिंह, न्यायाधीश केपी मरकाम, तपेश कुमार दुबे, हरिओम अतलसिया, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रश्मि वाल्टर, जिला रजिस्ट्रार कपिल वर्मा, रेलवे मजिस्ट्रेट विश्वदीपक तिवारी आदि उपस्थित थे।

16 खंडपीठों में 1029 मामलों में राजीनामा
विधिक सहायता अधिकारी चंद्रेश मंडलोई ने बताया लोक अदालत में 16 न्यायिक खंडपीठों में न्यायालयों में लंबित 355 प्रकरणों और 674 प्रालिटिगेशन के मामलों में समझौते हुए। प्रीलिटिगेशन के बैंकों के 30 प्रकरणों में रुकी वसूली 17 लाख 18 हजार 279 रुपए हुई। मोटर दुर्घटना दावा के 16 क्लेम प्रकरणों का निराकरण कर 42 लाख 49 हजार रुपए के अवॉर्ड पारित हुए। विद्युत कंपनी के न्यायालय में लंबित 77 व 141 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में राजीनामा होकर 23 लाख 89 हजार 70 रुपए के सेटलमेंट हुए। जलकर के 427 मामलों का निराकरण कर 21 लाख 63 हजार 510 रुपए की राशि वसूली गई। इस प्रकार लोक अदालत में कुल 1029 प्रकरणों का निराकरण हुआ और समझौता राशि 3 करोड़ 52 लाख 4601 रुपए वसूली गई। वहीं 1418 लोग लाभांवित हुए।