
जिला अस्पताल नवजात शिशु चिकित्सा गहन इकाई खंडवा
जिला अस्पताल का हाल : अस्थि , दंत रोग, रेडियोलॉजिस्ट के एक भी विशेषज्ञ नहीं, चिकित्सा अधिकारी 27 में सिर्फ 8 कार्यरत, इसी तरह सीएचसी-पीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग में 40 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों का स्थानांतरण हो गया। इसमें डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ समेत अन्य चिकित्सीय स्टाफ शामिल है।
जिला अस्पताल में प्रथम श्रेणी के विशेषज्ञों समेत पैरामेडिकल स्टाफ का थोक में स्थानांतरण हो गया। अस्थि, नेत्र, स्त्री रोग समेत पांच विशेषज्ञों चले गए। सर्जिकल विशेषज्ञ डॉ शैलेंद्र ने त्याग पत्र के लिए एक माह का नोटिस दिया है। गायनी में दो स्त्री रोग विशेषज्ञ में से डॉ राज चौधरी लंबे समय से अनुपस्थित हैं। यही नहीं अस्थि रोग विशेषज्ञ के चार स्वीकृत पदों पर एक भी डॉक्टर नहीं है। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ आदित्य जाधव का स्थानांतरण हो गया।
जिला अस्पताल में प्रथम श्रेणी के एक भी डॉक्टर नहीं हैं। दंत, रेडियोलॉजिस्ट एक भी नहीं है। हैरान करने वाली बात तो यह कि 27 चिकित्सा अधिकारियों में से सिर्फ आठ चिकित्सक हैं। जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है। मेडिकल अस्पताल के डॉक्टर नहीं हो तो इलाज बंद हो जाएगा। मामले में सिविल सर्जन डॉ अनिरुद्ध कौशल ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के संचालक को पत्र लिखकर डॉक्टरों के स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों की जानकारी भेजी है।
जिला अस्पताल में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ समेत अन्य बीस से अधिक का स्थानांतरण हो गया। बाहर से आने वालों की संख्या बहुत कम है। इसी तरह सीएचसी-पीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग में 40 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों का स्थानांतरण हो गया। इसमें डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ समेत अन्य चिकित्सीय स्टाफ शामिल है। रेगुलर की संख्या 27 है। इसके अलावा एनआरएचएम के 34 स्वास्थ्य कर्मचारियों का स्थानांतरण हो गया है। आने वालों की संख्या सिर्फ 16 है। इसमें आठ डॉक्टर समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हैं। गोराड़ीमाल और माेहना में एक भी डॉक्टर नहीं है।
प्रथम श्रेणी में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ शिखा कुड़ापे, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ बरखा कोचले, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ आदित्य जाधव समेत चिकित्सा अधिकारी ( स्त्री रोग ) डॉ लखन अखाड़े, चिकित्सा अधिकारी डॉ मोहित दुबे।
मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टर वार्ड में राउंड नहीं लेते हैं। ज्यादातर सीनियर चिकित्सक ओपीडी के बाद क्लास लेने चले जाते हैं। जिला अस्पताल में विशेषज्ञों समेत चिकित्सा अधिकारियों के नहीं होने से इलाज प्रभावित हो रहा है। जूनियर डॉक्टरों के भरोसे व्यवस्था जैसे-तैसे खिसक रही है। मेडिकल कालेज में इएनटी, गायनी, अस्थि रोग समेत अन्य विभाग में चिकित्सकों की नियुक्तियां हुई हैं। चयनित सभी चिकित्सकों ने ज्वाइन नहीं किया है। इससे इलाज प्रभावित हो रहा है। इलाज के साथ ही एमबीबीएस की कक्षाएं भी प्रभावित हो रही हैं। कुल मिलाकर मेडिकल काॅलेज अस्पताल में 40 प्रतिशत से अधिक स्टाफ की कमी है। सहायक संचालक डॉ सुनील बाजोलिया का कहना है कि नियुक्तियां हो रही हैं। पहले की तुलना में डॉक्टरों की संख्या बढ़ी है। इलाज सभी को मिल रहा है।
फैक्ट फाइल
जिला अस्पताल में स्वीकृति विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या
शिशु रोग विशेषज्ञ 07 03 04
स्त्री रोग विशेषज्ञ 04 02 02
अस्थि रोग विशेषज्ञ 04 00 04
दंत रोग विशेषज्ञ 02 00 02
ईएनटी विशेषज्ञ 02 02 00
एनेस्थेसिया विशेषज्ञ 06 01 05
मेडिसिन विशेषज्ञ 06 01 05
सर्जिकल विशेषज्ञ 04 03 01
नेत्र रोग विशेषज्ञ 02 00 02
रेडियोॉजिस्ट 04 00 00
पेथॉलाजिस्ट 03 01 02
क्षयरोग विशेषज्ञ 01 01 00
चिकित्सा अधिकारी 27 08 19
--------------------------------------------------------------
नोट : आंकड़़े स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई रिपोर्ट से लिए गए हैं।
वर्जन---डॉ ओपी जुगतावत, सीएमएचओ
जिला अस्पताल में इलाज प्रभावित नहीं है। मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों भी हैं। जानकारी शासन को भेजी गई है। संभावना है कि जल्द विशेषज्ञ अस्पताल को मिल जाएंगे। स्थानांतरण और पदस्थापना की प्रक्रिया शासन स्तर पर होती है। स्थानांतरण के साथ ही शासन से डॉक्टर समेत अन्य स्टाफ की नियुक्ति की है। चिकित्सक सभी संस्थाओं में हैं। कुछ जगहों पर प्रभार दिए गए हैैं।
Published on:
27 Jun 2025 11:52 am
बड़ी खबरें
View Allखंडवा
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
