
Campaign: Public bid, city needs bypass
खंडवा. बायपास और रिंगरोड के लिए शहर की जनता एक अर्से से मांग कर रही है। अब जब कलेक्टर ने नोएंट्री लगा दी है तो बायपास की जरूरत और बढ़ गई है। नोएंट्री लगने से शहरी यातायात में बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन शहर पार करने के लिए दूसरा कोई रास्ता नहीं होने से ट्रांसपोर्ट कारोबार भी प्रभावित होगा। पूर्व में किए गए धरना प्रदर्शन के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधि आश्वासन देते रहे जो अब तक कोरे ही साबित हुए हैं।
प्रस्ताव बनाने के बाद भूले
बायपास और रिंगरोड का मामला शहर विकास की योजना में शामिल किया गया था। इसके निर्माण में देरी होने पर शहर के एक वर्ग ने धरना प्रदर्शन कर प्रशासन का ध्यान इस मसले की ओर कराने की कोशिश की थी। तब राजधानी तक गूंजे इस मामले को दबाने के लिए अफसर आश्वासन देते रहे और फिर हाथ पर हाथ रखकर बैठ गए। अब नोएंट्री का आदेश आने के बाद बायपास जरूरत बन गया है।
इनका कहना है...
रिंग रोड ओर बायपास बजट में पास होने के बाद भी निर्माण की बाट जोह रहा है। दुर्घटनाओं में कई मासूमों की जान जाने के बाद भी प्रशासन जागा नहीं है। डेढ़ माह तक आंदोलन के बाद मिला लॉलीपॉप भी अब खत्म हो गया है। अब नोएंट्री में बायपास की जरूरत बढ़ गई है।
- अंशुल सैनी, शहरवासी
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नोएंट्री लागू होना बेहतर निर्णय है। लेकिन इस शहर को बायपास और रिंगरोड की जरूरत वर्षों से है। अब जब नोएंट्री में भारी वाहन शहर के अंदर नहीं आ सकेंगे तो बिना बायपास के ट्रांसपोर्ट कारोबार प्रभावित होगा। जनप्रतिनिधि और प्रशासन को इस ओर गंभीरता से सोचना चाहिए।
हेमंत मुंद्रा, शहरवासी
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खंडवा में रिंगरोड और बायपास के लिए कई महीने प्रदर्शन किया। मुंडन भी युवाओं ने कराया ताकि प्रशासन इस ओर ध्यान दे। 181 पर कई शिकायतें की गईं। लेकिन प्रशासन कोरे आश्वासन देकर उन शिकायतों को बंद कराता रहा। अब कलेक्टर ने नोएंट्री लगा दी है। इसलिए बायपास पर भी ध्यान देना चाहिए।
- दीपक राठौर मुल्लू, शहरवासी

Published on:
09 Apr 2022 01:07 pm
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