
खंडवा : जिपं कार्यालय की टेबल पर दबी भ्रष्टाचार की फाइलें, फोटो एआई
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में आला अफसरों के सरपरस्ती में भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। तभी तो पंचायतों में 55 से अधिक ग्राम पंचायतों में एक करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार हुआ है। अधिकारियों के जांच प्रतिवेदनों में एक करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। दागी सरपंच-सचिवों की फाइलें जिपं सीईओ की टेबल पर दबी है।
जपं खंडवा के जसवाड़ी ग्राम पंचायत में 10 लाख रुपए से ज्यादा वित्तीय अनियमितता हुई है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार सरपंच संगीता कुंवर सिंह और सचिव दिनेश सराठे ने सीसी सड़क समेत अन्य योजनाओं में वित्तीय अनियमितता की है। फाइल जिपं कार्यालय में दबी हुई है। इसका असर पंचायत के विकास पर पड़ रहा है।
खालवा ब्लाक के गारबेड़ी पंचायत में मनरेगा के तहत खेत तालाब निर्माण में 2.74 लाख रुपए से अधिक का भ्रष्टाचार है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार सरपंच रानूबाई, सचिव नारायण दिनकर और जीआरएस किशोर साध समेत लाभार्थी सुमंत्रा किशन, प्रेमा सानू पर 2 लाख 74 हजार रुपए वसूली योग्य बताई है। प्रकरण जिपं कार्यालय में लंबित है।
छैगांव माखन के टोकरखेड़ा पंचायत में खेत तालाब योजना में 3.51 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता की गई है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार सरपंच सदाशिव, वर्तमान सचिव मुकेश चौधरी, तत्कालीन सचिव राधा मालवीया समेत लाभार्थी बिहारी पंचार, पन्नालाल कुंजी, मनोहर सखाराम, बलीराम से राशि वसूली की जानी है। प्रकरण लंबे समय से लंबित है।
-हरसूद के शाहपुरा माल पंचायत में मां की बगिया के नाम पर 2.22 लाख का फर्जीवाडा़ हुआ है। जांच प्रतिवेदन में लाभार्थी कमला बाई, रमाबाई, रमोतीबाई, सोनिका बाई पर राशि वसूली योग्य बताई है। जिपं कार्यालय ने पेशी के लिए नोटिस जारी की है।
पंधाना के बलखड़ घाटी में कपिलधारा कूप के निर्माण में फर्जीवाडा़ कर लाभार्थियों ने 2.92 लाख आहरित कर लिया है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार लाभार्थी सुखराम टीकाराम, बरजोर सुखलाल पर 2.92 लाख रुपए वसूली के लिए प्रकरण दर्ज किया गया है। जिपं कार्यालय में सुनवाई के लिए प्रस्ताव आया है।
जपं कार्यालयों से 55 पंचायतों में वित्तीय अनियमितता का जांच प्रतिवेदन जिपं कार्यालय भेजा गया है। इसकी सुनवाई जिपं सीईओ को करना है। कुछ सरपंच-सचिवों ने कार्य पूर्ण कराने का आवेदन दिया है। जांच प्रतिवेदन में जांच अधिकारियों ने राशि वसूली योग्य बताई है। कुछ सरपंच-सचिवों ने कार्य कराने के लिए मौका मांगा है। लेकिन, अधिकतर जिपं सीईओ के द्वारा अभयदान दिया गया है। वित्तीय अनियमितता में 50 हजार से 15 लाख रुपए से अधिक तक मामले दर्ज हैं। पंचायतों में अनियमितता का औसत यदि दो लाख रुपए लिया जाए तो 110 लाख रुपए होता है। इस हिसाब से एक करोड़ 10 लाख रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है। वित्तीय अनियमितता जवाबदेही तय होने के बाद सामने आएगी।
पीपलकोटा, सरमेश्वर, खमलाय, टिगरिया, सोनूद, सिहाड़ा, पांगरा, जसवाड़ी, नहाल्दा, जामन्याकला, जावर, निशानियामाल, बोरगांव बुजुर्ग, टांभीखुर्द, ढोकरखेड़ा, किल्लौद, सुतारखेड़ा, खेड़ी, खारकला, पाचम्बा, राजपुरा, इस्लामपुर, पिपरहट्टी, पोखरखुर्द, बलखड़घाटी, खारवा, सुल्तानपुर, धनगांव, डोगरगांव, सहेजला, सांवखेड़ा, धनोरा, सड़ियापानी, शाहपुरामाल, सोमगांव खुर्द, मोजवाड़ीमाल, गारखेड़ी, गोलखेड़ा, सिरपुर, मोहद, मोहना, जावर, पटाल्दा, मोकलगांव, देवलामाफी आदि पंचायतों में वित्तीय अनियमितता की गई है। जांच प्रतिवेदन में कुछ पंचायतों ने अधिरोपित राशि जमा भी कर दिया है। इसमें सरपंच-सचिव के साथ कुछ पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायक भी शामिल हैं।
कलेक्टर बोले... समीक्षा करेंगे :
जांच प्रतिवेदन लंबित हैं। इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ से बात करेंगे।
पिंकी वानखेड़े, अध्यक्ष, जिला पंचायत
पंचायतों के लंबित प्रकरणों का समय सीमा निराकरण होना चाहिए। अगर ऐसा है तो इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ से चर्चा करेंगे।
Updated on:
07 Jul 2026 11:57 am
Published on:
07 Jul 2026 11:57 am
