
खंडवा। प्रदेश के खरगोन जिले में 55 यात्रियों से भरी बस खलघाट में बने नर्मदा नदी के पुल में इंदौर से महाराष्ट्र जाते समय ओवर टेकिंग के कारण गिर गई, जिसमें बड़ी संख्या में जनहानि हुई है। बावजूद इसके स्थानीय स्तर पर खंडवा-इंदौर मार्ग के मोरटक्का नर्मदा पुल जर्जर हो चुका है। कई स्थानों पर रेलिंग भी टूटी हुई जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाद भी पुल की प्रशासन सुध लेने को तैयार नहीं है।
बारिश में इस पुल की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है, पुल पर हो रहे गड्ढों से भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। भारी वाहन निकलने पर पुल स्वत: ही कांपने लगता है। वही जाम की समस्या की स्थिति भी आम है।
पुल की देखरेख का जिम्मा अब एनएचएआइ के पास है लेकिन वो भी आंखे मूंद बैठा है। जिसके कारण पुल का जीर्णोउद्घार नहीं हो पा रहा है। इस पुलिस से दो वाहन एक साथ नहीं निकल सकते है और ओवरटेकिंग भी असंभव है जिसके कारण यह पर भी खलघाट जैसी दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है, लेकिन इसको रोकने पर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।
मियाद हो चुकी खत्म
जिले के इंदौर-इच्छापुर हाइवे पर मोरटक्का के नर्मदा पुल की मियाद खत्म हो चुकी है। जर्जर अवस्था में है। हर साल नर्मदा की बाढ़ के थपेड़े खाने के बाद वाहनों को बोझ उठा रहा है। इस पुल पर कई हादसे हुए। वाहन रैलिंग तोड़ नदी में समाए और यहां भी असमय मौत का तांडव देखने को मिला है। लेकिन सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त अब तक नहीं किए गए हैं।
ये हुए थे हादसे
2021 को मोरटक्का पुल पर ट्रक और ट्रैक्टर.ट्राली की भिड़ंत हुईं। इसमें ट्रैक्टर चालक की मौके पर ही दम तोड़ा था। वहीं 17 जनवरी 2021 को मोरटक्का पुल पर ट्रक और ट्रैक्टर ट्राली के बीच भिड़त हुई। 2 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले 2018 को पुल पर बस और ट्रक के बीच भिड़ंत हुई थी। हादसे में बस का पहिया पुल से बाहर लटक गया था। गनिमत रही थी कि तब बड़ा हादसा नहीं हुआ। बस में सवार यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।
कभी भी ढह सकता है यह ब्रिज
ग्राम मोरटक्का से गुजरी नर्मदा नदी पर यह पुल बना है। यह अपनी उम्र पार कर चुका है। टू लेन पुल 1947 में लखनऊ के दरियावसिंह एंड कंपनी ने मात्र 25 लाख की लागत से बनाया था। अब इस पुल पर 24 घंटे ट्रैफिक चलता है।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंहस्थ 2016 में उज्जैन से ओंकारेश्वर व खंडवा की ओर जाने वाले यातायात के दबाव को देखते हुए इसी कंपनी को छह माह का अतिरिक्त समय देखकर इस मार्ग का सुधार कार्य करवाया था। तब से लेकर यह जर्जर हालत में आ गया है।
Updated on:
22 Jul 2022 06:13 pm
Published on:
22 Jul 2022 06:11 pm
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