
खंडवा. आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज।
जैन समाज के संत आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने शनिवार रात 2.30 बजे संल्लेखना पूर्वक समाधि (देह त्याग दी) ले ली है। छत्तीसगढ के डोंगरगढ स्थित चन्द्रगिरी तीर्थ पर उन्होंने अंतिम सांस ली है। इस खबर से देशभर में शोक की लहर है। खंडवा के जैन समाज में जैसे ही यह खबर पहुंची, पूरे समाज में मायूसी छा गई। रविवार शाम जैन मंदिरों में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी।
जैन समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि आचार्यश्री पिछले कुछ दिन से अस्वस्थ थे। उनके स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु के लिए मंदिरों में णमोकार मंत्र, भक्तांबर पाठ किया जा रहा था। पिछले दो दिन से उन्होंने अन्न जल का पूरी तरह त्याग कर दिया था। आचार्यश्री अंतिम सांस तक चैतन्य अवस्था में रहे और मंत्रोच्चार करते हुए उन्होंने देह का त्याग किया है। समाधि के समय उनके पास मुनिश्री योगसागर महाराज, समतासागर महाराज, प्रसादसागर महाराज संघ सहित उपस्थित थे।
दो दिन खंडवा में भी किया था प्रवास
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि आचार्यश्री के आशीर्वचनों से खंडवा के समाजजन भी लाभांवित हुए है। वर्ष 1997 में आचार्यश्री दो दिन खंडवा में रहे थे। सराफा स्थित जैन धर्मशाला में उनका प्रवास हुआ था। इस दौरान नगर निगम तिराहा पर एक धर्मसभा का भी आयोजन हुआ था। यहां बड़ी संख्या में जैन समाज सहित सर्वधर्म के लोग प्रवचन में शामिल हुए थे।
1968 में ली थी दीक्षा
आचार्यश्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक प्रांत के बेलगांव जिले के सदलगा गांव में हुआ था। उन्होंने 30 जून 1968 को राजस्थान के अजमेर नगर में अपने गुरु आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज से मुनिदीक्षा ली थी। आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज ने उनकी कठोर तपस्या को देखते हुए उन्हें अपना आचार्य पद सौंपा था। आचार्यश्री ने लगभग 350 दीक्षाएं दी हैं। उनके शिष्य पूरे देश में विहारकर जैनधर्म की प्रभावना कर रहे हैं।
Published on:
18 Feb 2024 12:55 pm
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