
खंडवा
खंडवा. जिले की प्रशासनिक सर्जरी हुई है और अब नए कलेक्टर ने कमान संभाल ली है। इस बीच ये मुद्दा उठा है कि हर कलेक्टर की प्राथमिकता अलग होती है, इसलिए विकास के काम अधूरे छूट जाते हैं। अब फिर से ऐसा न हो, इसके लिए बीते मुद्दों को साथ लेकर कलेक्टर अगर आगे बढ़ेंगे तो बेहतर परिणामों की उम्मीद की जा सकती है।
कलेक्टर अनय द्विवेदी ने गुरुवार को जिले की कमान संभाल ली है। फिलहाल उन्होंने शहर व जिले को समझने के बाद प्राथमिकताएं व रणनीति तय करने की बात कही है, लेकिन बीते तीन कलेक्टर के कार्यकाल को देखें तो लगभग हर बार यही हुआ है कि सभी की अपनी प्राथमिकताएं रहीं हैं। एक के नवाचार को आगे बढ़ाने में दूसरे ने कम ही रूचि ली। हर बार नए मुद्दों पर काम हुआ और फिर वे पूरे नहीं हुए तथा विकास अधर में ही अटक गया।
बीते तीन कलेक्टर्स का ऐसा रहा कार्यकाल
1. तन्वी सुन्द्रियाल : सीएसआर फंड पर ध्यान दिया, इससे अस्पताल व शिक्षा के लिए खर्च करने पर जोर दिया, लेकिन जो योजनाएं बनाई, वो धरातल पर उतरे इससे पहले उनका तबादला हो गया। शहर व जिले के पुराने मुद्दों को सुलझाने में भी सफल नहीं हो पाईं।
2. विशेष गढ़पाले : जिले में पसरे कुपोषण व शिक्षा पर ज्यादा ध्यान था, स्वागत में बुके नहीं बल्कि बिस्किट देने का नवाचार किया। लोकसेवक ऐप पर हाजिरी शुरू कराई, लेकिन इनके रहते भी जिले के अनसुलझे मुद्दों पर सफलता नहीं मिल पाई।
3. अभिषेक सिंह: संगीत के क्षेत्र में कलाकारों को बढ़ावा देने जैसे नवाचार किए, लेकिन इन्हीं मुद्दों को लेकर विवादों में भी घिरे। नए बस स्टैंड को शुरू कराने की डेडलाइन तय कराई। ये शुरू तो हुआ, लेकिन बसों का संचालन यहां से नहीं हो पाया।
जिले के ये मुद्दे जिन्हें निराकरण की दरकार
नर्मदा जल योजना: वाटर ट्रीटमेंट प्लांट चारखेड़ा से खंडवा तक की 50 किमी पाइपलाइन के स्थान पर 35 किमी नई पाइपलाइन के लिए 84 करोड़ रुपए की घोषणा की गई थी। सरकार बदली तो ये अटक गई। अब इसे सही तरीके से आगे बढ़ाना होगा।
ओंकारेश्वर विकास : कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने यहां के लिए डेढ़ सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास योजना तैयार की थी। कोरोना के संक्रमण काल में नई सरकार का अभी इस तरफ ध्यान नहीं है, लेकिन आने वाले वक्त में इसका क्या होगा, ये भी कलेक्टर पर निर्भर करेगा।
दादाजी मंदिर : अवधूत संत दादाजी के धाम को लेकर कमलनाथ सरकार विस में मप्र विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक-2019 लाई। इस मुद्दे पर तत्कालीन कलेक्टर तन्वी सुन्द्रियाल की बड़ी भूमिका थी, लेकिन अब नए कलेक्टर का क्या रूख होगा, ये देखना होगा।
हनुवंतिया : नए कलेक्टर भी पर्यटन विभाग से आए हैं, ऐसे में जिले के पर्यटन को भी बड़ी आस है। हनुवंतिया की जिस तरह से ब्रांडिंग की गई थी, वक्त के साथ उसका क्रेज कम हो गया। अब हनुवंतिया व अन्य पर्यटन स्थल विकसित करने पर किस तरह से काम होगा, ये भी भविष्य ही बताएगा।
Published on:
21 May 2020 11:24 pm
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