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MPPSC 2023 : चालक का बेटा बना सीइओ, एमपी पीएससी में हासिल की दोहरी सफलता

अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख ( आईएएस ) के चालक रूपसिंह सोलंकी के बेटे ऋतिक सोलंकी को दोहरी सफलता मिली है। इस बार एमपीपीएससी-2023 की परीक्षा पास कर जनपद पंचायत का मुख्य कार्य पालन अधिकारी बना

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खंडवा

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Rajesh Patel

Nov 09, 2025

MPPSC

अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख ( आईएएस ) के चालक रूपसिंह सोलंकी के बेटे ऋतिक सोलंकी को दोहरी सफलता मिली है।

अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख ( आईएएस ) के चालक रूपसिंह सोलंकी के बेटे ऋतिक सोलंकी को दोहरी सफलता मिली है। इस बार एमपीपीएससी-2023 की परीक्षा पास कर जनपद पंचायत का मुख्य कार्य पालन अधिकारी बना। इससे पहले ऋतिक वर्ष-2022 की परीक्षा पास कर एटीओ का पद हासिल किया।

चार माह पहले अलीराजपुर में था ज्वाइंनिंग

चार माह पहले जुलाई में अलीराजपुर में ज्वाइन कर नौकरी कर रहा था। बेटे की दोपहरी सफलता से पिता की बांछें एक बार फिर खिल उठीं। परिवार में खुशियों का ठिकाना नहीं है। अंबेडकर वार्ड-9 निवासी रूप सिंह सोलंकी अपर कलेक्टर का वाहन चालक हैं।

चालक पिता ने जीपीएफ से कर्ज लेकर पढ़ाया

वर्तमान अपर कलेक्टर से पहले एडीएम केआरबड़ोडे की गाडी़ चलाते थे। अफसरों के साथ ड्यूटी के दौरान उन्होंने ठान लिया कि उनके बेटे भी अफसर बनें। उन्होंने अपनी और पत्नी की आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर घर के खर्च में कटौती की। कपड़े और अन्य जरूरतों में समझौता कर जीपीएस बेचकर बेटे ऋतिक को दिल्ली में डीयू भेजा। यूपीएससी की कोचिंग करवाई।

बेटा एक दिन कलेक्टर जरूर बनेगा

ऋतिक ने एमपीएसी-2022 पास कर ट्रेजरी ऑफिसर बनने का सपना पूरा किया। एक बार फिर दूसरी सफलता हासिल की है। पिता को लगने लगा है कि एक दिन बेटा कलेक्टर जरूरत बनेगा। रूपसिंह सोलंकी का बड़ा बेटा राहुल मप्र वन सेवा परीक्षा में सफल होकर महाराष्ट्र की चंद्रपुर फॉरेस्ट अकादमी में प्रशिक्षण ले रहा है।

पिता के हौसले, त्याग से मिली मंजिल

पत्रिका से चर्चा में ऋतिक ने कहा कि मेरे माता-पिता जैसे कोई नहीं है। उनके त्याग, तपस्या और हौंसले ने मुझे मंजिल दिलाई। माता-पिता ने पेट काटकर मुझे और मेरे भइया को पढ़ाया। बेटे ऋतिक कहना है कि अभी कोशिश करेंगे कि कलेक्टर की कुर्सी तक पहुंचे।

राजेश्वरी बनी सीईओ

राजेश्वरी ( बिट्टू ) पिता शंकर सिंह चौहान निवासी अमलपुरा खंडवा ने एमपी पीएससी-2023 परीक्षा पास कर मुख्य कार्यपालन अधिकारी ( सीईओ ) बनी है। चौहान ने रात-दिन कड़ी मेहनत की। सपनों को हकीकत में बदलने सफल रही। चौहान ने अपने माता-पिता के साथ ही सगे संबंधित ने उत्साह वर्धन किया है।