-प्रशासन की फौज ने संयुक्त कार्रवाई में 15 जेसीबी, दो पोकलेन से छह घंटे में ढाई हेक्टेयर भूमि कब्जा मुक्त हा गई। प्रशासन ने यह कार्रवाई जल गंगा अभियान के तहत की है।
114 परिवारों के पक्के, 46 टीन शेड के अस्थाई मकान तोड़े
नगर निगम क्षेत्र के महात्मा गांधी नगर स्थित शकर तालाब की भूमि पर प्रशासन ने सख्ती से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। गुरुवार की सुबह राजस्व, पुलिस और निगम की संयुक्त कार्रवाई में 114 परिवारों के पक्के मकान तोड़े। मौके पर छोटे-बड़े मिलाकर 160 मकान जमींदोज हो गए। इसमें 46 टीन शेड के अस्थाई मकान शामिल हैं। खंडवा के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई पहली बार हुई है। स्थल पर चार जोन बनाकर 15 जेसीबी, 2 पोकलेन मशीन, 10 डंपर समेत अन्य संसाधनों की सहायता से तीन मंजिला ढहा दिया। सुबह चार बजे ही अधिकारी स्थल पर पहुंचे। एनाउंस कर छह बजे से तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुई। ज्यादातर लोग रात को भी घर खाली कर सामान बाहर कर लिए थे। कइयों को मालूम ही नहीं कि प्रशासन इस तरह से कार्रवाई करेगा। ऐन वक्त सामग्री मलबे में दब गई। मौके पर कार्रवाई के दौरान कई परिवारों ने दुबारा मोहलत मांगी। सख्ती से अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई।
तालाब की 16 एकड़ भूमि, तीन एकड़ पर कब्जा
शकर तालाब का रकबा 16 एकड़ दर्ज है। महारानी लक्ष्मी वार्ड की छोर में तालाब की भूमि पर दो हेक्टेयर पर पक्का मकान निर्माण कर लिया है। ज्यादातर मकान एक मंजिला के थे। दस से अधिक मकान तीन व दो मंजिला थे। प्रशासन ने चार माह पहले तालाब की भूमि का सीमांकन किया। अब तक चार बार नोटिस जारी की। समझाइश के बाद भी घर खाली नहीं किया। घरों में नोटिस चस्पा करने करने के बाद दो दिन पहले स्वयं कब्जा हटाने 48 घंटे की मोहलत दी। निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत के अनुसार तालाब की भूमि पर 137 पक्के निर्माण का अतिक्रमण था। इनमें से 26 मकानों के न्यायालय से स्टे है। इन्हें कार्रवाई से अलग रखा गया। शेष कार्रवाई हटा दिए गए।
36 साल से जमीन पर रह रहे
प्रभावित परिवार आरिफ खान और उसकी मां फैजाना ने कहा मजदूरी करते हैं। वर्ष 1990 में मकान की नींव रखी थी। छत बनाने में 30 साल लगे। दो मिनट में मलबे में तब्दील हो गया। मोशिर खान, शाहरूख खान ने कहा, स्टे है। इसके बाद भी मशीन से दीवार हिला दी।
इनका कहना, ऋषव गुप्ता, कलेक्टर का कहना है कि तालाब से अतिक्रमण हटाया गया है। जल गंगा अभियान के तहत तालाब का मूल स्वरूप पुनः स्थापित करने के साथ जल संरक्षण के रूप में पुनर्स्थापित किया जाएगा। जिनके न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त हुए हैं। उन्हें चिन्हित कर सुरक्षित रखा गया है। यह स्पष्ट है कि चूंकि तालाब की भूमि पर पट्टा नहीं दिया जा सकता, इसलिए स्थगन आदेश समाप्त होते ही इन मकानों को भी नियमानुसार हटाया जाएगा।