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पर्यावरण मंत्रालय ने दिया जल संसाधन विभाग के खिलाफ कार्रवाई का आदेश

-मामला आंवलिया बांध परियोजना का, जल संसाधन विभाग कर रहा निर्माण कार्य-पर्यावरणीय मंजूरी मिलने तक बांध के निर्माण पर पूर्ण रोक लगाई-बिना मुआवजे के डूबा दी थी 48 आदिवासियों की जमीन बांध के क्रेस्ट एरिया में

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खंडवा

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Manish Arora

Apr 12, 2022

पर्यावरण मंत्रालय ने दिया जल संसाधन विभाग के खिलाफ कार्रवाई का आदेश

खंडवा. आंवलिया बांध परियोजना।

खंडवा.
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा खंडवा जिले में बन रही आंवलिया मध्यम सिंचाई परियोजना के परियोजनाकर्ता जल संसाधन विभाग के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। साथ ही पर्यावरणीय मंजूरी मिलने तक बांध के निर्माण पर पूर्ण रोक लगा दी है। मंत्रालय द्वारा यह करवाई आंवलिया बांध परियोजनाकर्ता जल संसाधन विभाग द्वारा पर्यावरण सुरक्षा कानून, 1986 के तहत जारी पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के नोटिफिकेशन, 2006 का उल्लंघन करते हुए बिना पर्यावरणीय मंजूरी बांध बनाने के कारण की है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता आलोक अग्रवाल ने बताया कि आंवलिया मध्यम सिंचाई परियोजना खालवा ब्लाक में निर्माणाधीन है। इस परियोजना से 600 से अधिक आदिवासी परिवार प्रभावित हो रहे हैं। पर्यावरण सुरक्षा कानून, 1986 के तहत जारी पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के नोटिफिकेशन, 2006 के अनुसार पर्यावरण मंत्रालय की पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी। के पहले किसी भी परियोजना का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया जा सकता है। राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग द्वारा आंवलिया परियोजना की पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी के लिए सन 2017 में अर्जी दायर की गई थी, लेकिन इस मंजूरी के मिले बिना ही गैरकानूनी रूप से परियोजना का काम तेजी से चलाया गया।
प्रभावित परिवारों को पुनर्वास का भी लाभ नहीं
परियोजना से विस्थापित होने वाले आदिवासी प्रभावित परिवारों को भू-अर्जन कानून के अनुसार कोई भी पुनर्वास के लाभ नहीं दिए गए। 48 प्रभावितों की जमीन बांध के क्रेस्ट लेवल तक पानी भर कर डुबा दी गई। सरकार द्वारा सुनवाई न करने की स्थिति में बांध प्रभावितों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर बताया कि परियोजना बिना पर्यावरण मंजूरी के गैरकानूनी रूप से आगे बढ़ाई गई है और विस्थापितों को पुनर्वास के कोई लाभ नहीं दिए गए हैं। उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार एवं पर्यावरण मंत्रालय को दिए गए नोटिस के बाद पर्यावरण मंत्रालय ने जांच के उपरांत कानून का उल्लंघन पाते हुए परियोजना को उल्लंघन वाली परियोजना घोषित किया था। 14 फरवरी, 2022 को जल संसाधन विभाग की अर्जी की फाइल बिना मंजूरी दिए बंद कर दी गई थी। इसके बाद जल संसाधन विभाग द्वारा नई अर्जी लगाने पर यह आदेश दिया गया है.
पर्यावरण मंत्रालय का आदेश
जल संसाधन विभाग द्वारा पर्यावरण मंत्रालय के समक्ष पर्यावरणीय मंजूरी के लिए 23 फरवरी 2022 को नई अर्जी लगायी गई। जिस पर विचार करने के बाद केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय की राज्य इकाई राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण द्वारा 24 मार्च की बैठक में आदेश दिया है कि मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड परियोजनाकर्ता जल संसाधन विभाग के खिलाफ पर्यावरण सुरक्षा कानून 1986 की धारा-15 के तहत करवाई करे। साथ ही यह आदेश भी दिया गया है कि नई मंजूरी मिलने तक बांध का कार्य पूरी तरह बंद रखा जाए।
सजा और दंड का भी प्रावधान
अलोक अग्रवाल ने बताया कि पर्यावरण सुरक्षा कानून 1985 की धारा 15 के तहत उल्लंघन करने वाले परियोजनकर्ता को 5 वर्ष की सजा या 1 लाख रुपए का जुर्माना या दोनों दंड से दंडित किया जा सकता है। साथ ही पर्यावरण मंत्रालय द्वारा परियोजनाकर्ता की नई अर्जी पर तमाम शर्तों के साथ पर्यावरण समाघात निर्धारण रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। जिसकी जांच के बाद मंत्रालय निर्णय लेगा कि आंवलिया परियोजना को दंड के साथ मंजूरी देनी है या परियोजना को बंद करना है या उसे तोड़ देना है। आंवलिया बांध प्रभावितों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए मांग की है कि बांध के स्लूइस गेट को तोड़कर बिना पुनर्वास जिन 48 लोगों के खेतों में पानी भरा गया है, उसको खाली किया जाए।