13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वन अमले ने छापा मारा, गिरफ्तारी हुई, लेकिन व्यापार के लिए नहीं कराया पंजीयन

जैव विविधता अधिनियम के तहत पंजीयन जरूरी, जिले में सिर्फ तीन व्यापारियों के नाम पंजीयन, कार्रवाई के बाद भी सीख नहीं ले सके कारोबारी

2 min read
Google source verification
Forest staff raided, arrested, but not registered for business

Forest staff raided, arrested, but not registered for business

खंडवा. पंसारी की दुकानों पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई के बाद भी इस जिले में वन और जलीय औषधि का कारोबार करने वालों पर असर नहीं पड़ा। प्रतिबंधित औषधि बेचने के लिए जैव विविधता अधिनियम के तहत पंजीयन कराना जरूरी है। लेकिन मौजूदा समय में जिले में सिर्फ तीन पंजीयन हैं। इरफान शेख और मानू ट्रेडर्स के अलावा एक पंजीयन खंडवा शहर की फर्म ने कराया है, जो अब काम नहीं कर रही है। बड़ी बात यह है कि शहर के जो दो पंसादी कार्रवाई के दायरे में आए थे, उनके पंजीयन इस अधिनियम के तहत अभी तक नहीं हुए।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
पंसारी दुकान की आड़ में तंत्र- मंत्र के लिए प्रतिबंधित वन्य जीवों के अंग, पाउडर और जल संपदा को बेचने के मामले में 13 सितंबर 2022 को सर्च वारंट के आधार पर श्री पंसारी एवं नत्थू पंसारी के यहां वन विभाग की टीम ने छापा मारा था। श्री पंसारी दुकान की तलाशी के दौरान हाथा जोड़ी, ब्लेक कोरल, अम्ब, सी फेन, कड़वा कुट, मीठा कुट, पेगोलियन शेल, सियार सिंगी, सींग का टुकड़ा, सफेद शंख आदि सामग्री जप्त की गई थी। नत्थू पंसारी दुकान में सीफेन, लाल चंदन लकड़ी एवं पाउडर, हाथी दांत पाउडर, सांभर सींग चुरा सूखा, मीठा कूट आदि सामग्री मिली थी। कार्रवाई के दौरान वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 39, 42, 44(1), 44ए, 44बी, 50, 51, 17ए, 17बी, 17 सी, 17 डी, 17जी, 17एफ एवं जैव विवधता अधिनियम 2002 की धारा 7, 24, 55(2), 57, 58 के अंतर्गत केस दर्ज कर आरोपी नितिन पिता बालगोविंद अग्रवाल, अजय पिता भजन लाल और उनके पुत्र गौरव पर कार्रवाई की गई थी। इस प्रकरण में एसटीएफ ने दखल देते हुए प्रदेश के कई हिस्सों में दबिश दी थी। मौजूदा समय में आरोपी जमानत पर हैं और वन विभाग को फॉरेंसिक लैब भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने पर ही प्रकरण का चालान अदालत में पेश होगा।
पंजीयन कराना पड़ेगा
आइएफएस अनुराग तिवारी का कहना है कि जैव विविधता अधिनियम के तहत पंजीयन कराने के बाद ही वन और जलीय औषधि में कुछ ऐसे तत्व बेचे जा सकते हैं, जिनकी सरकार अनुमति देती है। कई व्यापारी इस अधिनियम का महत्व नहीं समझते हैं। इस पंजीयन से एक प्रतिशत हिस्सा लघु वन उपज की समितियों को जाता है।
वर्जन...
जैव विविधता अधिनियम के तहत लाइसेंस लेना जरूरी है। जिन्होंने नहीं लिया, उनकी जानकारी जुटाकर जांच कराएंगे।
- जेपी मिश्रा, वन परिक्षत्र अधिकारी, खंडवा