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गणगौर पर्व : इसर राजा, गौरा पार्वती माता को झूले में झुलाया, कच्ची कैरी का लगाया भोग, बौड़ाए रथ

-चैत्र शुक्ल चतुर्थी पर कई समाजों ने किए ज्वारे विसर्जन -गुरव, कहार, मांझी समाज सहित अन्य समाजों में आज भंडारे, शाम को होगी विदाई

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खंडवा

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Manish Arora

Mar 23, 2026

gangour

खंडवा. माता को पानी पिलाने गांधी भवन में उमड़ी भीड़

निमाड़ के लोकपर्व गणगौर का उल्लास अब अंतिम चरण में है। तीज पर बाड़ी से ज्वारे लाकर श्रद्धालुओं ने रथों के साथ घर ले जाकर पूजा-अर्चना की। रातभर भजन कीर्तन के बाद रविवार को पारिवारिक भोजन हुए। रविवार चैत्र शुक्ल चतुर्थी पर माता को पानी पिलाने गांधी भवन लाया गया। यहां शहरभर के रथ पहुंचे। कई परिवारों, समाजों ने माता को पानी पिलाने के बाद गणगौर घाट पर ज्वारों का विसर्जन किया।

घाट पर किए ज्वारे विसर्जन
जिलेभर में गणगौर पर्व उत्साह, उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। रविवार धनियार राजा और रणुबाई को पानी पिलाने के लिए गांधी भवन लाया गया। गांधी भवन में माता को पानी पिलाने के साथ ही धानी, कच्ची कैरी का भोग लगाया गया। यहां से कई लोगों द्वारा गणगौर घाट पर ले जाकर ज्वारे ठंडे किए गए। वहीं, कई परिवारों द्वारा रथ बौड़ाए गए। रथ बौड़ाने वाले समाजों, परिवारों द्वारा भंडारा प्रसादी का आयोजन किया जाएगा। शाम को चल समारोहपूर्वक विसर्जन होगा।

अमाड़ी की भाजी का लगाया भोग, हुआ भंडारा
रविवार को गुरव समाज बांबे बाजार पंचायत द्वारा गुरवेश्वर मंदिर कहारवाड़ी में माता के रथ सजाए गए। यहां धनिय राजा, रणुबाई को कच्ची कैरी, धानी का भोग लगाकर अमाड़ी की भाजी, ज्वार की रोटी और लौंजी का भंडारा भी समाजजनों के लिए हुआ। वहीं बांबे बाजार कहारवाड़ी गणगौर उत्सव समिति द्वारा मातारानी को झूले में सवार कराकर झुले दिए गए। शाम को संजय नगर, शिवाजी नगर, कहारवाड़ी, गुरव मोहल्ला, आनंद नगर, माता चौक, ब्राह्मणपुरी सहित शहर के विभिन्न मोहल्लों में विराजित माता के रथों को गांधी भवन लाया गया।

कई समाजों ने रोके रथ, आज देंगे भंडारा
यहां श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना कर विसर्जन के लिए गणगौर घाट ले जाया गया। यहां ज्वारों को प्रणाम कर विसर्जन किया गया। वहीं शहर में अधिकतर स्थानों पर रथ बौड़ाए (रोके) गए। कहारवाड़ी, गुरवा मोहल्ला, सिंघाड़ तलाई, गणेश तलाई, बड़ा अवार, संजय नगर सहित कई स्थानों पर सोमवार को भंडारों का आयोजन किया जाएगा इसके बाद ज्वारे ठंडे किए जाएंगे। भंडारों के दौरान कहार, गुरव समाज द्वारा पत्तल परोसने से लेकर जूठी पत्तल उठाने तक की बोली भी लगाई जाएगी।

माता मायके से जाती है ससुराल
गणगौर की कथा प्रचलित है कि रणुबाई चैत्र में अपने मायके आती है। चैत्र की तीज को धनियार राजा रणुबाई को लेने अपनी ससुराल जाते है। चौथ को माता अपने ससुराल चली जाती है। हालांकि कई समाजों में माता को रोकने (रथ बौड़ाने) की परंपरा भी चली आ रही है। जिसके चलते माता को पंचमी और छठ तक भी रोका जाने लगा है।