
ई-गवर्नेंस में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जिला पंजीयक, उप पंजीयक, रीडर को दिया गया प्रशिक्षण
भू-स्वामियों को नामांतरण, बंटवारा और राजस्व प्रकरणों में सहूलियत मिलें और उन्हें तहसीलों का चक्कर नहीं लगाना पड़े। सरकार ने इसके लिए साइबर तहसील परियोजना शुरू की है। यह योजना 1 जनवरी से लागू करने की घोषणा की गई है, लेकिन चालू करना तो दूर जिम्मेदारों ने अभी तक तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जिला पंजीयक, उप पंजीयक, रीडर्स को शत-प्रतिशत प्रशिक्षण तक नहीं दिया है।
प्रदेश में कुछ तहसीलों में चालू हो गई
तहसीलों में राजस्व अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में कुछ तहसीलों में चालू हो गई है। इसे जिले में भी जल्द शुरू होगी। प्रशिक्षण की प्रकिया चल रही है। सरकार राजस्व विभाग में भू-स्वामियों के सहूलियत के लिए साइबर तहसील परियोजना शुरू की है। प्रारंभ में इंदौर समेत प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चालू की गई। सफलता मिलने पर 1 जनवरी से पूरे प्रदेश में शुरू करना है। इस योजना में सबकुछ योजना के तहत हुआ तो जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले क्रेता-विक्रेता को तहसीलदार, पटवारी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
जमीन की रजिस्ट्री के दौरान फार्म- एक व बी की प्रक्रिया
रजिस्ट्री कार्यालय में सेवा प्रदाता जमीन की रजिस्ट्री के दौरान फार्म- एक व बी की प्रक्रिया पूरा करेगा। फार्म-ए में क्रेता व विक्रेता की डिटेल और फार्म-बी में भूमि की जानकारी दर्ज करेगा। रजिस्ट्री कार्यालय का सेवा प्रदाता पोर्टल आरसीएम से लिंक कर दिया गया हैै। जमीन की रजिस्ट्री होते ही तहसीलदार की लॉगिन पर शो करने लगेगा। तहसीलदार नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करेंगे। भूमि विवाद की स्थिति में पटवारी क्रेता-विक्रेता को मोबाइल से मैसेज के साथ सूचना देंगे। परीक्षण करने के बाद पटवारी नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराएंगे। इसके लिए उन्हें तहसील आने जाने की जरूरत नहीं है।
अभी ऐसे मिलेगा लाभ
साइबर तहसील की प्रक्रिया में अभी ऐसे भू-स्वमियों को लाभ मिलेगा जिनका सर्वे नंबर पूरा क्रय-विक्रय होगी। उदाहरण जैसे एक हेक्टेयर भूमि का एक खसरा नंबर है। एक नंबर की पूरी भूमि विक्रय की गई है। तो क्रेता के नाम साइबर तहसील से ऑटोमेटिक नामांतरण की प्रक्रिया हो जाएगी। यदि इसमें आधा रकबा या फिर इससे कम रजिस्ट्री हुई तो अभी रूटीन नियम से ही नामांतरण की प्रक्रिया चलेगी।
आरसीएमएस पहलेसे ही चालूनामांतरण, बंटवारा समेत राजस्व प्रकरणों की सुनवाई के लिए कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के कोर्ट में रेवन्य केस मैनेजमेंट सिस्टम ( आरसीएमएस ) व्यवस्था लंबे समय से चल रही है। इसी पोर्टल से सेवा प्रदाता का पोर्टल लिंक किया जाएगा।
इन जिलों में पहले से
राजस्व विभाग ने मप्र भू-राजस्व संहिता, 1959 में संशोधन कर धारा 13-क में साइबर तहसील स्थापना का प्रावधान किया है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, हरदा, दतिया, इंदौर, सागर, डिंडौरी, ग्वालियर, आगर-मालवा, श्योपुर, बैतूल, विदिशा एवं उमरिया में चालू की गई थी। सीएम ने इस प्रदेश की सभी तहसीलों में 1 जनवरी से लागू करने की घोषणा की है।
प्रशिक्षण शुरू
कलेक्ट्रेट में मंगलवार को ं सायबर तहसील का प्रशिक्षण दिया गया। जिला ई-गवर्नेंस प्रबंधक अनिल चंदेल ने बताया कि तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जिला पंजीयक, उप पंजीयक, रीडर ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
● भूमि की रजिस्ट्री के बाद ऑनलाइन नामांतरण
● रजिस्ट्री के बाद क्रेता को नामांतरण का नहीं देना होगा आवेदन
● जमीन की रजिस्ट्री होते ही आगे की प्रक्रिया के लिए आएगा मैसेज
● पटवारी पूछताछ के लिए स्वयं क्रेता-विक्रेता को करेंगे मैसेज
● ऑनलाइन रजिस्ट्री दिनांक से 15 दिन के भीतर पूरी होगी प्रक्रिया ● रजिस्ट्री कराने वालों को पटवारी, तहसील का नहीं लगाना होगा चक्कर
साइबर तहसील की तैयारी पूरी है। स्टेट स्तर पर सभी एक बार प्रशिक्षित हो चुके हैं। रिवीजन के लिए बुलाया गया है। जिससे किसी को किसी भी स्तर पर डाउट नहीं रहे। ऑनलाइन प्रक्रिया आसानी से पूरी हो सके। 1 जनवरी से शुरू होना था, लेकिन अभी ऑफिशियल इनाग्रेशन नहीं हुआ है। संभावना है जल्द शुरू होगा।
अंशु जावला, संयुक्त कलेक्टर
Published on:
03 Jan 2024 11:35 am
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