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Health Benefits Of Semal; मध्यप्रदेश में मिला सेमल का दुर्लभ पेड़, कई बीमारियों में है कारगर

Health Benefits Of Semal- स्टूडेंट्स ने खोजा दुर्लभ पीले सेमल का पेड़, कई रोगों का होता है इलाज, जैव विविधता पंजी में किया दर्ज, शोध के लिए काम आएगी वनस्पति

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खंडवा

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Manish Geete

May 08, 2023

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Health Benefits Of Semal

Health Benefits Of Semal. लोक जैव विविधता पंजी निर्माण के लिए प्रयास कर रहीं वनस्पति शास्त्र की प्रोफेसर और उनके सहयोगी छात्रों की टीम ने दुर्लभ वनस्पति पीला सेमल की खोज की है। खंडवा से भोपाल के रास्ते में आष्टा के पास सड़क किनारे पीले सेमल का पेड़ पाया गया, जिसे पंजी में दर्ज कर लिया गया है। इसे बॉम्बेक्स सिबा और बॉम्बेक्स इन्सिग्ने भी कहते हैं। यह वनस्पति मालवेसी कुल की सदस्य है। इसका जनजातीय नाम खट्सावर, सौरी व थोड़ी है।

यहां खिला प्रदेश में विलुप्त हो चुका पीला फूल, बचे हैं महज दो पेड़

पीले सेमल की छाल के पावडर से पैरों के गोखरू, पुराना कब्ज, सिफीलिस एवं बवासीर जैसी बीमारियों में जल्द लाभ मिलता है। इसकी जड़ का काढ़ा पीने से मीजल्स से ठंडक रहती है। टॉनिक के रूप में भी इसकी जड़ों को खाते हैं।

इस टीम ने खोजी वनस्पति

मप्र में जैवविविधता बोर्ड ने 200 जनपदों में स्थानीय जैव विविधता पंजी बनाने की जिम्मेदारी दी है। इसमें श्री नीलकंठेश्वर महाविद्यालय प्राचार्य के निर्देशन में डॉ. शकुन मिश्रा को प्रमुख अन्वेषक का काम सौंपा गया है। खंडवा की टीम एसबीबी भोपाल के सहायक संचालक डॉ. बकुल लाड, तकनीकी विशेषज्ञ, कुनिका सिलोडिया के मार्गदर्शन में जमीनी स्तर पर काम कर रही है। इस सर्वेक्षण टीम में छात्रा शिवानी सोनी, नम्रता सिसौदिया, सिंधु सुचार, महेश पंवार, रजनी पटेल, ईशा शेंडे, संतोष राठौर शामिल हैं।

पहले मिला थापीला पलाश

निमाड़ के जंगलों में दुर्लभ प्रजाति के जीव- जंतु, औषधि और पुरातन महत्व के स्थानों की खोज को एक पंजी में दर्ज किया गया है। पीला सेमल खोजने वाली टीम ने कुछ समय पहले ही निमाड़ के जंगलों में दुर्लभ पीले पलाश की तलाश की थी। यह बहुत कम स्थानों पर देखने को मिलता है।

यहां खिला प्रदेश में विलुप्त हो चुका पीला फूल, बचे हैं महज दो पेड़

प्रदेश में विलुप्त हो चुके पीले सेमल के महज दो पेड़ अब जबलपुर में ही बचे हैं। जिनमें आए पीले फूलों ने राज्य वन अनुसंधान संस्थान (एसएफआरआइ) के वैज्ञानिकों के चेहरे खिल उठे हैं। इस दुर्लभ प्रजाति को बचाने में जुटे वैज्ञानिक पीले सेमल के पौधे उगाने की तैयारी में लगे हैं। इस साल 100 पौधे उगाने का लक्ष्य लिया है। एसएफआरआइ के वैज्ञानिकों का दावा है कि प्रदेश से पीला सेमल विलुप्त हो चुका है। जबकि लाल सेमल बहुतायत में पाया जाता है। पीले सेमल के दो पेड़ जबलपुर के ग्वारीघाट क्षेत्र में हैं, जिनका संरक्षण किया जा रहा है। सेमल में आए पीले फूल को बचाने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। इनमें से एक को संस्थान में शिफ्ट किया गया था, जो तैयार हो गया और पीले फूल आ गए हैं।

(यहां पढ़ें विस्तार से)