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मप्र : मनरेगा से गोशाला पर 700 करोड़ खर्च…फिर भी नहीं बढ़ा गायों का कुनबा, अब निजी निवेश से बढ़ाने की तैयारी

सरकार गोपालन को बढ़ाने स्वावलंबी गोशालाओं की स्थापना करेगी। इस योजना में निजी पूंजी निवेश के तहत प्रत्येक जिले में एक-एक गौ-शाला ( कामधेनु निवास ) बनाई जाएगी। इसके चयन के लिए राज्य स्तरीय बोर्ड गठित किया है। चयनित निवेशक को सरकार 50 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराएगी।

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खंडवा

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Rajesh Patel

Jul 26, 2025

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019 से लेकर अब तक गोशालाओं पर 700 करोड़ रुपए खर्च कर 2727 गोशालाओं का निर्माण कराया है। इसके बाद भी चालू वर्ष की पशुगणना में गौवंशों का कुनबा घट गया। भैंस वंश और बकरी-बकरा की प्रजातियां बढी हैैं। पशु- एवं चिकित्सा विभाग ने प्रत्येक जिले से मांगा प्रस्ताव, गौ-शालाओं में बायो सीएनजी, जैविक खाद प्लांट समेत स्थापित कर सकेंगे पर्यटन की गतिविधियां

5000 गायों को रखने की क्षमता की बनेगी गोशालाएं

सरकार गोपालन को बढ़ाने स्वावलंबी गोशालाओं की स्थापना करेगी। इस योजना में निजी पूंजी निवेश के तहत प्रत्येक जिले में एक-एक गौ-शाला ( कामधेनु निवास ) बनाई जाएगी। इसके चयन के लिए राज्य स्तरीय बोर्ड गठित किया है। चयनित निवेशक को सरकार 50 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराएगी। गोशालाओं में 5000 गायों को रखने की क्षमता होगी। इसमें भाग लेने निजी निवेशकों को 50 करोड़ रुपए का निवेश और 10 करोड़ रुपए की जमानत राशि का एमओयू करना होगा। पशु पालन एवं डेयरी विभाग ने प्रत्येक जिले से एक-एक प्रस्ताव मांगा है। खंडवा में दो माह के भीतर अभी एक प्रस्ताव आया है। इसका परीक्षण किया जा रहा है।

मनरेगा से गोशालाओं पर 700 करोड़ खर्च हो चुके

पशु एवं डेयरी विभाग के पत्र के अनुसार गोशाला नीति-2025 में कहा है कि वर्ष 2019 की पशु गणना के बाद लगातार गौ-वंश घट रहे हैं। मनरेगा के तहत बीते छह साल में प्रदेशभर में 2727 गौ-शालाओं का निर्माण किया गया है। पंचायत विभाग ने इस पर करीब 700 करोड़ रुपए खर्च किया है। वर्ष 2024-25 में इस पर 250 करोड़ रुपए राज्य निधि से खर्च किया गया है। अब नई नीति के तहत गोशालाओं को बढ़ावा मिलेगा।

गौ-संवर्धन के साथ बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन

शासन की इस परियोजना से न केवल गौ-संवर्धन नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, हरित ऊर्जा उत्पादन और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। बल्कि परिसर में बायो सीएनजी, सोलर प्लांट, जैविक खाद का उत्पादन कर सकेगा। स्थानीय स्तर पर ऊर्जा और जैविक खाद का उत्पादन संभव होगा। प्रत्येक गौ-शाला में 500 से अधिक लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

100 अंक मिलने पर होगा चयन

गौ पालन का अनुभव पर 20 अंक निर्धारित है। इसमें तीन वर्ष का अनिवार्य है। 500 से 1000 गौ-वंश पर 10 अंक, 5 हजार से अधिक पर 20 अंक मिलेंगे। बायो सीएनजी उत्पादन में वार्षिक टर्नओवर-10 करोड़ होने पर 15 अंक, नस्ल सुधार, दूध उत्पादन का वार्षिक टर्न ओवर एक करोड़ या अधिक होने पर 5 अंक, चारा विकास पर 10 अंक, सौर ऊर्जा व्यवसाय में वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ पर 5 अंक। डीपीआर में 12 करोड़ के टर्नओवर पर 10 अंक, 16 करोड़ के टर्न ओवर पर 15 अंक मिलेंगे। इस तरह से 100 अंक या सबसे अधिक अंक जुटाने वाले का चयन किया जाएगा।

हर माह 60 लाख का अनुदान

खंडवा जिले में पहले से ही छोटी-छोटी 27 गौ-शालाएं संचालित हैं। इसमें 13 शासकीय और 14 निजी गौ-शलााएं हैं। सभी को मिलाकर करीब 5000 गायें हैं। इन गौ-शालाओं को सरकार हर माह लगभग 60 लाख रुपये का अनुदान देती है। जिससे गायों के लिए चारा, भूसा और दाना की व्यवस्था की जाती है।

ये होगी पात्रता

-न्यूनतम 5000 गौवंशों को रखने की क्षमता ।

500 निराश्रित गौ-वंश पालन का तीन वर्ष का अनुभव ।

-10 करोड़ का टर्न ओवर ।

-बायोगैस संचालन का 3 वर्ष तक अनुभव ।

-न्यूनतम 50 करोड़ निवेश की परियोजना ।

इनका कहना...डॉ हेमंत शाह, उप संचालक, पशु पालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं, खंडवा

शासन ने स्वावलंबी गौ-शाला के लिए एक प्रस्ताव मांगा। जमीन की तलाश की जा रही है। महाराष्ट्र के एक निवेशक ने प्रस्ताव के लिए आवेदन दिया हैै। शासन की गाइड लाइन के तहत प्रस्ताव पर विचार विमर्श किया जा रहा है। परीक्षण के बाद प्रस्ताव भेजा जाएगा।