
Mid-day meal: Mid-day meal did not reach the school, children were suffering from hunger
खंडवा. शहर के घासपुरा प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को मध्याह्न भोजन नहीं पहुंचा। दोपहर में बच्चे लगभग ढाई घंटे तक भूख से तड़पते रहे। भोजन के इंतजार में भूख से परेशान कुछ बच्चे घर चले गए। कई बच्चों ने घर से टिफिन मंगवाए। माध्यमिक स्कूल की लड़कियों को नमकीन, चिप्स खाकर संतोष करना पड़ा। दोपहर में बच्चे भूख से परेशान होते रहे और शिक्षक कार्यालय में लंच करते रहे। हेडमास्टर का तर्क है कि भोजन देर से आने के बाद बच्चों को दिया गया। कुछ बच्चे घर से भोजन करके आ चुके थे। केंद्रीयकृत रसोई के संचालक की मनमानी के चलते शहर के कई स्कूलों में पूड़ी और सब्जी ही दी गई, जबकि मैन्यू में मंगलवार को पूड़ी, खीर, मटर या छोले की सब्जी,लेकिन ज्यादतर स्कूलों में खीर की आपूर्ति नहीं की गई।
शिक्षकों से घर पर फोन लगवाकर भोजन मंगवाए
शहर के घासपुरा में स्थित माध्यमिक कन्या शाला परिसर में कक्षा एक से 8वीं तक बच्चों की पढ़ाई होती है। यहां पर 325 बच्चे पंजीकृत हैं। मंगलवार को 255 बच्चे आए थे। दोपहर बाद करीब 2.45 बजे तक मध्याह्न भोजन नहीं पहुंचा। बच्चे कक्षा से बाहर निकले तो भोजन नहीं मिला। इस दौान जो बच्चे टिफिन लाए थे वह लंच करने लगे। जिन बच्चों को मध्याह्न भोजन नहीं मिला वह भूख से परेशान रहे। कुछ बच्चों ने शिक्षकों से घर पर फोन लगवाकर भोजन मंगवाए। स्कूल के आस-पास रहने वाले घर चले गए। बताया गया कि स्कूल में करीब पौने तीन बजे भोजन आया। देर से भोजन आने के बाद कुछ बच्चों को भोजन परोसा गया।
प्राथमिक शाला गांधी भवन में नहीं आई खीर
मंगलवार को कई स्कूलों में बच्चों को खीर नहीं दी गई। प्राथमिक व माध्यमिक शाला गांधी भवन में पूड़ी और आलू की सब्जी ही दी गई। यहां पर माध्यमिक शाला पहली पॉली में लगती है। जबकि प्राथमिक शाला सुबह दस बजे लगती है। माध्यमिक स्कूल के बच्चे 11 बजे भोजन कर रहे थे। शिक्षकाओं ने बताया पूडी और सब्जी बच्चों को परोसी गई। खीर नहीं आई है। इसी तरह प्राथमिक शाला की शिक्षकों ने बताया कभी-कभी खीर आती है।
सौ बच्चों को ही भेजा मध्याह्न भोजन
घासपुरा में जैसे-तैसे दोपहर बाद करीब पौने तीन बजे स्कूल में भोजन भी पहुंचा। भोजन महज 100 बच्चों के लिए रहा। शिक्षकों ने बताया कि स्कूल में ज्यादातर बच्चे टिफिन लाते हैं। स्कूल के आस-पास वाले बच्चे दोपहर लंच में भोजन करने घर चले जाते हैं। इस लिए कम बच्चों के लिए भोजन लिया जाता है। यहां पर सौ से डेढ़ सौ बच्चे मध्याह्न भोजन करते हैं
स्कूल में भोजन देर से आया, स्कूल के आप-पास के रहने वाले बच्चे भोजन करने घर चले गए थे। कुछ बच्चे हर रोज की तरह आज भी टिफिन लाए थे। मध्याह्न भोजन की सप्लाई करने वाले कर्मचारी ने बताया आटो खराब हो गया था। गोपाल भास्करे, हेडमास्टर, माध्यमिक कन्या शाला,घासपुरा
स्कूल में मध्याह्न भोजन करीब ढाई बजे आया। इसकी वजह रसोई में लकड़ी गीली होना बताया गया। भोजन आने के बाद बच्चों को भोजन दिया गया।
दीपक राठौर, शिक्षक, माध्यमिक कन्या शाला, घासपुरा
Published on:
27 Jul 2022 12:08 pm
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