
खंडवा. जिले में चारों विस का जातिगत समीकरण।
विधानसभा चुनाव 2023 के रण मैदान की स्थिति साफ हो गई है। दोनों दलों के योद्धा चुनावी मैदान में है। अब मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की कवायद सभी पार्टियां कर रही है। जिले की तीन आरक्षित और एक सामान्य सीट पर जातिगत समीकरण भी अहम भूमिका अदा करता है। दोनों प्रमुख पार्टियों की नजर जातिगत मतों पर है। चुनाव में निर्णायक रहने वाले जातिगत मतदाताओं को साधने की तैयारियां भी पार्टी के चुनाव विशेषज्ञ बंद कमरों में कर रहे है।
यह है जातिगत समीकरण
खंडवा विधानसभा अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां मतदाताओं की बात की जाए तो सर्वाधिक मतदाता बलाही समाज के है। इसके साथ ही ब्राह्मण समाज, अल्पसंख्यक वर्ग सहित ओबीसी और सामान्य वर्ग भी यहां निर्णायक स्थिति में है। वर्तमान में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के उम्मीदवार बलाही समाज से है। अपने समाज के मतदाताओं सहित ब्राह्मण और अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधना दोनों प्रत्याशियों के लिए चुनौती रहेगी।
कोरकू समाज करता निर्णय
हरसूद विधानसभा अजजा (एसटी) में सर्वाधिक मतदाता कोरकू आदिवासी समाज से है। यहां जनसंख्या के हिसाब से करीब 40 प्रतिशत कोरकू मतदाता है, जो हर चुनाव में निर्णायक रहते है। इसके अलावा सामान्य, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग भी यहां अहम भूमिका निभाता है। वर्तमान में कांग्रेस से कोरकू समाज के सुखराम सालवे मैदान में है। सात बार विधायक रहे विजय शाह गौंड समाज है, लेकिन कोरकू समाज में अच्छी पकड़ रखते है।
बंजारा समाज को साधना चुनौती
मांधाता विधानसभा जिले की एकमात्र सामान्य सीट है। यहां सर्वाधिक गुर्जर मतदाता है। दूसरे नंबर पर राजपूत समाज आता है। यहां तीसरी शक्ति के रूप में बंजारा समाज मौजूद है। इसके अलावा अल्प संख्यक, ओबीसी राठौर समाज भी यहां अहम भूमिका में है। यहां कांग्रेस से राजपूत समाज के उत्तमपाल और भाजपा से गुर्जर समाज के नारायण पटेल मैदान में है। दोनों प्रत्याशियों को एक-दूसरे के समाज में सेंध लगाने के साथ बंजारा समाज को साधना होगा।
ओबीसी वर्ग पर रहेगी निगाहें
पंधाना विधानसभा आदिवासी आरक्षित सीट है। यहां भील समाज की बाहुल्यता है। भील समाज के बाद यहां सबसे अधिक मतदाता गुर्जर और कुनबी पटेल ओबीसी वर्ग से आते है। इसके अलावा यहां सामान्य वर्ग भी अहम मतदाता है। कांग्रेस की रूपाली बारे और भाजपा की छाया मोरे दोनों ही भील समाज से आते है। यहां आदिवासी मतों का बंटवारा होने के बाद दोनों दलों की निगाहें ओबीसी वर्ग के मतदाताओं पर रहेगी।
Published on:
23 Oct 2023 01:25 pm
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