
खंडवा. तीन पदकों के साथ दिव्यांग तलवारबाज विशाखा पाराशर।
नारी शक्ति, आत्मबल और संघर्ष की मिसाल बनकर खंडवा की बेटी विशाखा पाराशर ने चेन्नई में आयोजित नेशनल पैरा फेंसिंग (तलवारबाजी) चैंपियनशिप में कीर्तिमान रच दिया है। चेन्नई में 4 से 6 जुलाई तक आयोजित हुई नेशनल फेंसिंग चैंपियनशिप में विशाखा ने बी कैटेगरी में 1 गोल्ड और 2 सिल्वर मेडल जीतकर देशभर के खिलाडिय़ों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
साई सेंटर में ले रही प्रशिक्षण
विशाखा वर्तमान में गांधीनगर स्थित स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) में नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रही हैं। उनकी अगली तैयारी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर भारत का परचम लहराने की है। अपने संघर्ष और मेहनत से उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यदि संकल्प मजबूत हो तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं होता।
2015 में दुर्घटना के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत
विशाखा पाराशर के जीवन की कहानी साहस, संकल्प और संघर्ष का जीवंत उदाहरण है। वर्ष 2015 में एक दुर्घटना में छत से गिरने के कारण उनकी रीड की हड्डी में गंभीर चोट आई थी, जिससे उनके शरीर का निचला हिस्सा काम करना बंद कर गया था। डॉक्टरों की राय में जिंदगी सामान्य नहीं रह सकती थी, लेकिन विशाखा ने अपनी कमजोरी को हार मानने के बजाय अपनी ताकत बना लिया। विशाखा के पिता विजय पाराशर एवं माता ने कभी हार नहीं मानी और अपनी बेटी को हर संभव मानसिक, भावनात्मक और नैतिक समर्थन दिया। इसी प्रोत्साहन से प्रेरित होकर विशाखा ने खेलों में अपने भविष्य को आकार देना शुरू किया। उनकी इच्छाशक्ति और लगातार अभ्यास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया जहां आज वे देश की एक होनहार तलवारबाज बन चुकी हैं।
Published on:
08 Jul 2025 11:45 am
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