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सेवा, त्याग, समर्पण सिखाती है राष्ट्रीय सेवा योजना

राष्ट्रीय सेवा योजना के शिविर का औपचारिक उद्घाटन हुआ

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National Service Scheme teaches service, sacrifice, dedication

National Service Scheme teaches service, sacrifice, dedication

खंडवा. भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांव की सेवा से राष्ट्र की सेवा होती है। युवाओं में सेवा की भावनाओं के साथ नेतृत्व विकसित करने के उद्देश्य से महात्मा गांधी की जन्म शताब्दी पर मात्र 400 विद्यार्थियों के साथ राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना की गई। उस समय बोया गया बीज आज विशाल वटवृक्ष बन गया है। गांव और शहर की खाई के पाटने के साथ परस्पर प्रेम, एकता के साथ राष्ट्र की सेवा करना विद्यार्थी अवकाश के समय सीखता है। आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना राष्ट्रीय सेवा योजना में सम्मिलित है। राष्ट्रीय सेवा योजना में काम करते हुए विद्यार्थी त्याग, सेवा, समर्पण सहनशीलता, एकता का पाठ पढ़ता है। यह विचार निबंधकार एवं संस्कृति चिंतक डॉ. श्रीराम परिहार ने मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। वह श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के सात दिवसीय शिविर के औपचारिक उद्घाटन सत्र में विद्यार्थियों के बीच बोल रहे थे। डॉ. परिहार ने राष्ट्रीय सेवा योजना के इतिहास, भारत की संस्कृति, ग्रामीण संस्कृति, भाषा के महत्व, युवाओं के कर्तव्य पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। इसके पूर्व एनसीसी ऑफिसर डॉ. एसएस ने कहा कि हम हमें शिविर से कुछ ना कुछ सीख कर जाना है, इसलिए बेहतर है कि हम प्रतिदिन एक अच्छी आदत को सीखे और उसे अपने जीवन में उतारें। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निमाड़ अंचल नेत्रहीन संघ के संचालक नंदराम आवचे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हम सब अपने अधिकारों के प्रति तो सजग हैं लेकिन कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं। दिव्यांग संवेदना या दया का पात्र नहीं है बल्कि मात्र सहयोग भाव से हाथ पकडऩे का आकांक्षी है। वह किसी से कम नहीं है, यह हमें ध्यान रखना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन छात्र नारायण राठौर एवं रिया गुप्ता ने किया। जबकि आभार सलोनी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के छात्र प्रतिनिधि के रूप में मंचासीन परशुराम कास्डे ने काल करे सो आज कर गीत का गायन कर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया।