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ओंकारेश्वर व बुरहानपुर में बनने वाले अभयारण्य में सांसद, मंत्री ने अड़ाया पेंच

आदिवासी और वन्य जीव के जीवनयापन की परेशानी का दिया हवाला, वनमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिख अभयारण्य के प्रोजेक्ट को स्थगित करने की मांग

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धर्मेंद्र दीवान। खंडवा. टाइगर स्टेट मप्र के निमाड़ में विकसित होने वाले राष्ट्रीय उद्यान और नए अभयारण्य के निर्माण में अड़चन आ खड़ी हुई है। अभयारण्य के निर्माण में क्षेत्रीय सांसद नंदकुमार सिंह चौहान और प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने हजारों आदिवासी परिवार और वन्यप्राणी की परेशानी का हवाला दिया है। जिससे निमाड़ क्षेत्र में मिलने वाली अभयारण्य की सौगात पर खतरा मंडरा रहा। सांसद और मंत्री वर्मा ने वन मंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिख टाइगर सेंचुरी प्रोजेक्ट का स्थगित करने की मांग की है।

टाइगर सेंचुरी के प्रोजेक्ट करें स्थगित, अतिक्रमण रोकने सरकार के साथ खड़े
खंडवा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान ने दो माह पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ और वनमंत्री उमंग सिंघार को लिखे पत्र में कहा कि खंडवा, बुरहानपुर जिले के घनी आबादी वाले क्षेत्र में लाखों लोग निवास करते है। उक्त क्षेत्र को टाइगर सेंचुरी में सम्मिलित किया जा रहा। इससे लाखों लोग प्रभावित होंगे। सेंचुरी के प्रोजेक्ट का स्थगित किया जाए। साथ ही सांसद ने जंगल में हो रहे अतिक्रमण रोकने के लिए सरकार के साथ खड़े होने का लिखा।

वन्यप्राणी और आदिवासियों को होगी परेशानी
प्रदेश के लोक निर्माण, पर्यावरण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने पर्यावरणविद/वन्यजीव संरक्षक अशोक बिसेन का पत्र संलग्न कर वनमंत्री को पत्र लिखा। इसमें मांधाता, सिंगाजी अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान के जल्दबाजी में गठन से बेजुबान वन प्राणी और आदिवासियों के जीवनयापन पर परेशानी होगी।

इधर, अभयारण्य के विकसित होने से नहीं होगा विस्थापन
वन विभाग के अफसरों का दावा है कि ओंकारेश्वर वन्य प्राणी अभयारण्य, बड़वाह में देवी अहिल्या बाई होल्कर अभयारण्य और बुहानपुर जिले में महात्मा गांधी वन्यप्राणी अभयारण्य के जो नक्शे बनाए गए है। उसमें गांवों को छोड़ते हुए तैयार किया गया है। राजस्व, वनग्राम को दूर रखते हुए अभयारण्य की सीमा बनाने का प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा गया, जो पेडिंग पड़ा है। ओंकारेश्वर वन्य प्राणी अभ्यारण्य का अधिकांश हिस्सा इंदिरा सागर और ओंकारश्वर डैम बैकवाटर एरिए में रहेगा। देवास जिले के कुछ दो-तीन वन ग्राम ही प्रभावित होंगे। जिन्हें विस्थापित किया जाएगा।

किस अभ्यारण्य का कितना रहेगा दायरा
- ओंकारेश्वर अभयारण्य 614.07 वर्ग किमी में विकसित होगा। निमाड़ का सबसे बड़ा ओंकारेश्वर अभयारण्य रहेगा। इंदिरा सागर, ओंकारश्वर के बैकवाटर व नर्मदा नदी के आसपास बनेगा। यह पुनासा, मूंदी चांदगढ़ वन परिक्षेत्र के अलावा देवास जिले का वन क्षेत्र शामिल होगा। देवास जिले के सतवास, कांडाफोड़, पुंजापुरा और उदयनगर वन परिक्षेत्र का आंशिक क्षेत्र शामिल होगा।
-बुरहानपुर में महात्मागांधी अभयारण्य कुल 153.58 वर्ग किमी यानी 15358 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा। इसमें बोरदली के 7 कक्ष और खकनार वनपरिक्षेत्र के 15 कक्ष आएगा। मेलघाट टाइगर अभयारण्य से पास रहेगा।
-देवीअहिल्याबाई वन्य अभयारण्य बड़वाह वनमंडल में विकसित होगा। इसका दायरा 69 वर्ग किमी होगा। जिसका ज्यादातर क्षेत्र इंदौर के चोरल वन परिक्षेत्र रहेगा। इसमें इंदौर का 3690 हेक्टेयर और बड़वाह वनमंडल की 3278 हैक्टेयर वनभूमि आएगी।

अभ्यारण्य के विकसित करने में प्रभावित होने वाले कुछ गांवों के नाम समाचार पत्रों से ही पता चला था। इसलिए मैंने एक सुझाव दिया कि बुरहानपुर में अभयारण्य के विकसित करने से कोई गांव या परिवार प्रभावित न हो। नंदकुमारसिंह चौहान, सांसद

निमाड़ में राष्ट्रीय उद्यान व अभ्यारण्य विकसित होंगे। जिनके प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे गए हंै। अभयारण्य से राजस्व व वनग्राम को दूर रखा गया है। कोई भी गांव या व्यक्ति प्रभावित नहीं होगा। एसएस रावत,
सीसीएफ, खंडवा।