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किसान नेता का बड़ा बयान, अबकी बार दस गुना ताकत से घेरेंगे दिल्ली

खंडवा में किसान नेता शिवकुमार शर्मा कक्काजी का बड़ा बयान...।

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खंडवा

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Manish Geete

Jan 04, 2022

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खंडवा। चुनाव में हमारी कोई भूमिका नहीं हैं, हमारा संगठन चुनाव नहीं लड़ेगा, लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों की मांगें समय सीमा में पूरी नहीं की तो यूपी चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा और दस गुना ताकत से दिल्ली पहुंचेंगे।

यह बात किसान नेता शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी' ने मंगलवार को कही। वे पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। कक्काजी ने चुनाव लड़ने की बात पर कहा कि किसानों के 540 संगठन हैं, उसमें से 2-4 संगठन चुनाव लड़ना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं। उन्हें लगता है कि वे चुनाव लड़कर किसानों का भला कर सकते हैं तो करों। हम नहीं जाएंगे। हमारा संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) चुनाव नहीं लड़ेगा। जो जाएगा वो एसकेएम से बाहर हो जाएगा।

टैक्स के दायरे में कृषि

कक्काजी ने कृषि से आय को टैक्स के दायरे में लाने के सवाल पर कहा कि एग्रीकल्चर इनकम उस कंडीशन में टैक्स के दायरे में आएगी, जब हम किसान उस माल की कीमत तय करेंगे। हम चाह रहे हैं कि स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशों के हिसाब से हमारे लिए सरकार कानून बनाए।

मोदीजी ने भाषण में कहा था

कक्काजी ने कहा कि मोदीजी ने अपने भाषण में भी कहा था कि हम सरकार में आएंगे तो स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार किसानों को फसल की उपज के दाम देंगे। जब उन्होंने नहीं दिया तो हम सुप्रीम कोर्ट में गए। सरकार ने जवाब दिया कि हम इसके मुताबिक दाम नहीं दे सकते। और पार्लियामेंट में वे कहते हैं कि हमने दे दिया। अब झूठ का तो कोई हिसाब नहीं है।

दस गुना ताकत से दिल्ली आएंगे

कक्काजी ने कहा कि हमारा आंदोलन जिस ताकत से चला है। यदि सरकार एमएसपी पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो इससे दस गुनी ताकत से हम दिल्ली के चारों तरफ होंगे। भारत का हर किसान इस लड़ाई में शामिल होगा।

तोमर को कोई अधिकार नहीं

कक्काजी ने कहा कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के हाथ में कुछ नहीं हैं, 11 राउंड चर्चा में हमें महसूस हुआ कि वे एक सामान्य आदमी हैं, उनको कोई अधिकार नहीं हैं।

यूपी चुनाव में दिखाएंगे ताकत

कक्काजी ने उत्तर प्रदेश के चुनाव के बारे में कहा कि यूपी इलेक्शन के पहले हम तय करेंगे कि जो सरकार ने किसानों की मांगों के बारे में लिखकर दिया है, वो पांच मांगे पूरी होना चाहिए। हरियाणा और किसानों के मुकदमे वापस लेने की बात थी। पराली जलाने पर किसानों को आपराधिक प्रकरण से दूर रखा जाएगा। बिजली विधेयक बिल पर भी लिखा था कि किसान बढ़े हुए बिजली के दाम नहीं देंगे। जो किसान शहीद हुए हैं, उसके परिवार को नौकरी दी जाए। यदि सरकार इन मांगों को समय सीमा में पूरा नहीं करती है तो मजबूरन हमें यूपी चुनाव में जाना पड़ेगा और किसानों को एकजुट करना पड़ेगा।