खंडवा। ओंकारेश्वर और ममलेश्वर शिवलिंग की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग में की गई है। इसलिए कहा जाता है कि जो ओंकारेश्वर शिवलिंग के दर्शन करेगा उसे ममलेश्वर के भी दर्शन करने पर ही पूरा पुण्य प्राप्त होता है। ओंकारेश्वर नर्मदा नदी के एक तट पर है, जबकि ममलेश्वर दक्षिणी तट पर है। श्रावण में इस तीर्थ पर आने का एक अलग ही महत्व है। यहां का कंकड़-कंकड़ शिवलिंग कहलाता है। नर्मदा के जल से भोलेनाथ का अभिषेक किया जाता है।
दुनिया में अनोखा है ये मंदिर, आरती के वक्त रहता है बंद
इस मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के मुताबिक यहां आरती के वक्त मंदिर में प्रवेश की अनुमति किसी को भी नहीं है। सिर्फ राजपुरोहित ही इस मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा मंदिर प्रांगण में लगे कैमरे और माइक भी बंद कर दिए जाते हैं। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के मुताबिक बताया जाता है कि आज तक ओंकारनाथ की आरती कोई नहीं देख पाया है। यहां आरती के बाद पट खुलते हैं और श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलता है।
यह है आरती का समय
मंगला आरती प्रातः 4 से 4.30
मध्याह्न आरतीः दोपहर 12.20 से 1.15
शयन आरतीः 8.30 से 9.30