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माटी की महक : सात समंदर पार लंदन में निमाड़ी लोकपर्व गणगौर की धूम, भारतीय ने सहेजी विदेश में अपनी संस्कृति

थारा काई काई रूप बखाणु रणु बाई, सोरठ देस सी आई हो... -देश से हजारों मील दूर साफ्टवेयर इंजीनियर दंपत्ति 8 साल से निभा रहे परंपरा -गणगौर के गीत गाकर दिए झालरिए, 14 निमाड़ी, राजस्थानी परिवार हुए शामिल

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खंडवा

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Manish Arora

Mar 23, 2026

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खंडवा. लंदन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर दंपति ने की गणगौर की स्थापना।

थारा काई काई रूप बखाणु रणु बाई, सोरठ देस सी आई हो… जैसे पारंपरिक गीतों की गूंज सात समंदर पार लंदन में सुनाई दे रही है। जहां निमाड़ और राजस्थान की संस्कृति के लोक उत्सव की धूम मची हुई है। अवसर था लोकपर्व गणगौर का, जिसे शनिवार शाम भारतीय मूल के परिवारों ने पूरे उत्साह के साथ मनाया।

संस्कार तो मन में बसते हैं
हमारी बहू-बेटियों ने देश छोड़ा है, संस्कार नहीं। आजीविका की मांग पर अपनों से दूर बसना मजबूरी हो सकती है, लेकिन संस्कार तो मन में बसते हैं। खंडवा की बेटी और खंडवा की ही बहू सोनल अभय शर्मा ने सुदूर लंदन में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अपने आवास पर सहेलियों और परिजनों के साथ पारंपरिक भारतीय परिधानों में गणगौर महापर्व पूरी श्रद्धा, भक्ति और परम्परा से मनाया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर गणगौर माता की पूजा-अर्चना की और लोकगीत गाकर झालरिए दिए।

कई किमी की यात्रा कर पहुंचे आयोजन में
खंडवा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर दंपत्ति सोनल अभय शर्मा ने पिछले 8 वर्षों से इस परंपरा को जीवित रखा है। इस वर्ष कार्यक्रम में करीब 14 निमाड़ी और राजस्थानी परिवारों के 54 सदस्यों ने भाग लिया। सभी को महापर्व मनाने के लिए अवकाश लेना पड़ा और कई किलोमीटर की यात्रा भी करनी पड़ी। गणगौर क गीतों ने माहौल को पूरी तरह भारतीय बना दिया। बिछोह भले ही कुछ समय का हो सारी सहेलियां नम आंखें और अच्छी यादें लेकर अपने घरों को प्रस्थान कर गई।

पूरी तरह से निमाड़ी रूप में हुआ आयोजन
गणगौर के आयोजन में विदेश में बसे बच्चों और युवाओं ने भी उत्साह के साथ भाग लेते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और अपनाने का प्रयास किया। महापर्व का समापन माता रानी की प्रसादी ग्रहण करने के साथ हुआ। लंदन में भी निमाड़ी परंपरानुसार सोनल और अभय शर्मा ने खीर-पूड़ी, सब्जी, रायता, दाल-चावल की प्रसादी परोसी। विदेश में मानों निमाड़ी गणगौर में होने वाले भंडारा प्रसादी की याद को ताजा कर दिया।

हर साल मनाते हैं गणगौर पर्व
निमाड़ी संस्कृति को बढ़ावा देने प्रयासरत साहित्यकार व सोनल के ससुर गोविंद शर्मा ने बताया कि बेटा अभय ब्रिटिश कंपनी में साफ्टवेयर इंजीयिनर है और बहु भी साफ्टवेयर वेयर इंजीनियर है, लेकिन स्कूल में एडमिन की जॉब कर रही है। निमाड़ से जुड़े होने के कारण अपनी संस्कृति के बहुत करीब है, इसलिए हर साल लंदन में भी ये आयोजन करते है। उनके इस प्रयास से अब लंदन में रहने वाले निमाड़ी और राजस्थानी परिवार ही नहीं, साथ काम करने वाली साउथ इंडियन फैमिली भी जुडऩे लगी है। गणगौर को उत्तर और दक्षिण भारतीय परिवार भी जानने लग गए हैं।