
खंडवा. एमसीयू का खंडवा विस्तार परिसर कर्मवीर हो रहा बंद।
जिस शहर को देशभर के साहित्यकार राष्ट्र कवि पं. माखनलाल चतुर्वेदी के नाम से जानते हैं, वहां उनके नाम की अंतिम विरासत भी प्रदेश सरकार ने खत्म कर दी है। एक ओर पं. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्व विद्यालय के खंडवा परिसर कर्मवीर विद्यापीठ के लिए भवन की मांग उठ रही थी। दूसरी ओर सरकार ने इस पर ताला लगाने का ही निर्णय ले लिया है। आगामी एक जुलाई से यहां पत्रकारिता तो दूर दूसरे विषयों की भी पढ़ाई नहीं होगी।
दादा माखनलाल चतुर्वेदी के नाम पर पत्रकारिता विश्वविद्यालय खोलने की नींव 1990 में रखी गई। दादा के नाम पर यह पत्रकारिता विश्वविद्यालय उनकी कर्मभूमि खंडवा में खुलना था, लेकिन अधिकारियों की जिद से भोपाल में पत्रकारिता विश्वविद्यालय खोला गया। इसके बाद खंडवा के जख्मों पर मरहम लगाते हुए यहां वर्ष 2000 में खंडवा परिसर कर्मवीर विद्यापीठ की शुरुआत की गई। किराये के भवन में शुरू हुए खंडवा परिसर को दिलासा दिया गया कि जल्द ही स्वयं का भवन बनाकर दिया जाएगा। कर्मवीर को खुद का भवन मिलना तो दूर 26 साल बाद किराये का भवन भी छीन लिया गया है। यहां मकान मालिक को भी तीन माह का नोटिस भवन खाली करने के लिए दे दिया गया है।
कर्मवीर के लिए चार बार भूमि का चयन हुआ, लेकिन हर बार भोपाल विश्वविद्यालय ने कोई रुचि नहीं दिखाई। पहली बार 15 साल पहले 8 एकड़ भूमि छैगांव माखन में सीवी रमन विश्वविद्यालय के पास चुनी गई थी, जिसे विश्वविद्यालय ने यह कहकर खारिज कर दिया कि यह दूर है। दूसरी बार पांच एकड़ जमीन जसवाडी रोड पर चीरा खदान मल्टी के पीछे चिह्नित की गई थी, यहां भोपाल के अधिकारियों ने इसे उबड़ खाबड़ बताकर खारिज कर दिया। तीसरी बार फिर पांच एकड़ जमीन हरसूद रोड पर सेंट्रल स्कूल के पास चिह्नित की गई। इसे भी उबड़ खाबड़ बताकर खारिज कर दिया गया। यहां आज नया एसडीएम ऑफिस और सीएम राइस स्कूल बन रहे हैं।
चौथी बार महापौर अमृता अमर यादव के प्रयासों से नगर निगम के स्वामित्व की दो एकड़ उपलब्ध हो गई। इसकी सारी प्रशासकीय प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन विश्वविद्यालय ने कोई रूचि नहीं दिखाई। खंडवा के पत्रकारों के प्रयासों से यह जनसंपर्क विभाग को हैंडओवर होनी थी, लेकिन पूर्व कलेक्टर की लेट लतीफ की वजह से अटक गई। इस जमीन पर अब बीएड कॉलेज में हॉस्टल निर्माण शुरू कर दिया है।
28 जून 2022 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नगर निगम चौराहे पर भूमि उपलब्ध कराने की जो घोषणा की थी। उसे सीएम घोषणा के पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया। इसी वजह से कलेक्टर ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। भोपाल स्तर के विश्वविद्यालय के लोगों ने भी इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। जिसके चलते पिछले 26 साल से किराये के भवन में संचालित कर्मवीर पर ताले लगाने की नौबत आ गई।
Updated on:
29 Jun 2026, 12:41 PM IST
Published on:
29 Jun 2026, 11:32 AM IST
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