
मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक में डॉक्टर नहीं, मरीजों की नब्ज टटोल रहे नर्सिंग ऑफिसर
जिला प्रशासन सरकार से मेडल मिलने के बाद भले ही अपनी पीठ थपथपा रहा है। लेकिन फील्ड में जनता को मिलने वाली सेवाओं की मॉनीटरिंग भगवान भरोसे है। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो आला अफसरों की नाक के नीचे मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक में डॉक्टरों की कुर्सियां खाली हैं। कहीं डॉक्टर समय से नहीं पहुंच रहे तो कुछ में डॉक्टर ही नहीं हैं।
शहरी क्षेत्र में वार्ड स्तर पर क्लीनिक में मरीजों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं, समय से भी नहीं खुल रहा ताला, मरीज परेशान। शहर में तीन से अधिक नई संजीवनी क्लीनिक बनकर तैयार हैं अभी तक चालू नहीं हो सकी। वार्ड स्तर पर संजीवनी क्लीनिक में सुविधाएं नहीं मिलने से सर्दी जुकाम और बीपी शुगर की जांच नहीं होने से मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में सामान्य मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। गुरुवार की सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच पत्रिका की टीम मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक पर पहुंची तो तस्वीरें खुद ब खुद हकीकत बयां कर रहीं हैं।
मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक भगत सिंह चौक मराठी स्कूल में पदस्थ डॉ श्रेया जैन ने एक अगस्त को रिजाइन दे दिया। यहां नर्सिंग आफिसर सीमा भास्कले मरीजों का नब्ज टटोल रहीं हैं। मरीजों के पूछने पर नर्सिंग ऑफिसर ने जवाब दिया कि डॉक्टर एक अगस्त से नहीं आ रहीं हैं। उनके रिजाइन के बाद यहां पर कोई पदस्थ नहीं हुआ। प्रतिदिन करीब सौ से अधिक मरीज आते हैं। पंद्रह दिन से पर्चे पर दवाएं दी जा रही है। इलाज नहीं दिया जा रहा हैै। यहां पर कंप्यूटर ऑपरेटर, फार्मासिस्ट पदस्थ हैं।
शासन ने जिले में बाण्ड वाले 69 डॉक्टरों की नियुक्ति की है। बीस दिन से अधिक समय बीतने के बाद अभी तक सिर्फ 31 डॉक्टरों ने ज्वाइन किया है। जबकि 38 डॉक्टरों को 30 अगस्त तक समय दिया गया है। पीएचसी गुड़ाली माल में और गोल में डॉक्टर नहीं हैं।
सुबह 10.30 बजे तक डॉक्टर नहीं, दरवाजा खटखटा रहे मरीज
रामेश्वर रोड पर पुलिस चौकी के निकट मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक पर डॉक्टर संजय वास्केल पदस्थ हैं। मरीज सुबह 10.30 बजे दरवाजा खटखटा रहे हैं। कुर्सी पर डॉक्टर नहीं हैं। फार्मासिस्ट की कुर्सी पर सपोर्ट कर्मचारी राकेश यादव मरीजों को दवाएं बांट रहे। मरीजों के पूछने पर सपोर्ट कर्मचारी ने जवाब जवाब दिया कि अभी डॉक्टर साहब नहीं आए हैं। कुछ देर से आएंगे। नर्सिंग स्टॉफ छह माह के मैटरनिटी लीव पर हैं। इनकी जगह संजय नगर की नर्सिंग आफिसर अटैच है। साढ़े दस बजे तक न तो फार्मासिस्ट और न ही कंप्यूटर ऑपरेटर मौजूद रहा। महिला मरीज आशिफा बीपी का चेकअप कराने पहुंचीं। आशिफा ने सपोर्ट कर्मचारी से कहा वह कल भी आईं थीं। लेकिन जांच नहीं हुई। आज जांच के लिए पहुंची तो डॉक्टर ही नहीं मिले। मरीज बोले डॉक्टरों के आने-जाने का समय नहीं है।
इनका कहना...डॉ ओपी जुगतावत, सीएमएचओ
शहर में तीन संजीवनी क्लीनिक संचालित हैं। शेष क्लीनिक को चालू करने स्टाफ नहीं है। शासन को प्रस्ताव भेजा गया हैै। जिन केंद्रों पर कर्मचारी समय से नहीं आ रहे हैं। उनकी जांच कराएंगे।
Updated on:
22 Aug 2025 12:19 pm
Published on:
22 Aug 2025 12:14 pm
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