
खंडवा : उच्च शैक्षणिक संस्थानों में सीटें खाली हैं। फोटो एआई
चालू शैक्षणिक सत्र 2026 में शासकीय कॉलेजों में यूजी-पीजी की 7720 सीटों में से अभी तक 3340 सीटों पर छात्रों ने प्रवेश लिया है। अब तक 4380 सीटें खाली हैं। कॉलेज स्तर पर काउंसलिंग शुरू की गई है। 15 जुलाई तक डेडलाइन दी गई है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12 वीं बोर्ड परीक्षा में 7506 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। बावजूद इसके शासकीय कॉलेजों में स्नातक ( यूजी ) की 6030 सीटों में से अब तक सिर्फ 2666 पर ही प्रवेश हो पाया है। यानी 3364 सीटें अभी भी खाली हैं। स्नातकोत्तर (पीजी) की 1690 सीटों में से 674 पर प्रवेश हुए हैं और 1016 सीटें रिक्त हैं। यह स्थिति बताती है कि जिले के बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए इंदौर, भोपाल और अन्य शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
शिक्षाविद और छात्रों मानना है कि खंडवा में रोजगारपरक ( जॉब ओरिएंटेड) और स्किल आधारित पाठ्यक्रमों की कमी है। पुराने ढर्रे पर ही कॉलेजों में परंपरागत कोर्स जैसे बीए, बीएससी की पढ़ाई हो रही है। उच्च शिक्षा में बेहतर कोर्स के साथ परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण संस्थानों का अभाव है। कॉलेजों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण नहीं होने से छात्र बाहर जाने को मजबूर हैं। कुछ अभिभावक तो 11वीं से ही बच्चों को नीट, जेईई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इंदौर, भोपाल जैसे शहरों में भेज देते हैं।
इ-प्रवेश प्रकिया का तीसरा राउंड खत्म हो गया। सीएलसी राउंड के साथ अतिरिक्त व्यवस्था 15 जुलाई तक शुरू की है। दो जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार जिले के अग्रणी काॅलेज एसएन कॉलेज में यूजी-पीजी की 2870 सीटें हैं। इसमें अब तक 1717 सीटों पर प्रवेश हो चुका है। जबकि अभी 1151 सीटें खाली हैं। इसी तरह जीडीसी में 1330 सीटों में से 713 में प्रवेश हुआ है। अभी 617 सीटें खाली हैं। यही हाल मॉडल, पुनासा, हरसूद, मूंदी समेत अन्य कॉलेजों की है। निजी कॉलेजों की सीटें एक तिहाई भी नहीं भरी हैं।
डॉ. प्रताप राव कदम, पूर्व प्राचार्य एवं साहित्यकार
प्राध्यापकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ा है। यदि पढ़ाई का माहौल और अकादमिक गुणवत्ता नहीं सुधरी तो छात्रों का पलायन रोकना मुश्किल होगा। शासकीय कॉलेजों में प्राध्यापकों का अधिक समय प्रशासनिक कार्यों में निकल जाता है, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है। छात्र भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर जा रहे हैं।
सतीश पटेल, प्रशासकीय प्रबंधक, निजी कॉलेज
आज का विद्यार्थी डिग्री के साथ रोजगार भी चाहता है। जिले में स्किल आधारित और जॉब ओरिएंटेड पाठ्यक्रम शुरू करने होंगे, तभी स्थानीय कॉलेज छात्रों को आकर्षित कर पाएंगे। निजी कॉलेजों में अभी भी बीए, बीकॉम और बीएससी जैसे परंपरागत पाठ्यक्रम ही प्रमुख हैं। उद्योगों और रोजगार से जुडे स्किल आधारित कोर्स नहीं होने से छात्र ऐसे संस्थानों को चुनते हैं, जहां पढ़ाई के साथ रोजगार की संभावनाएं भी मजबूत हों।
प्राचार्य भूपेंद्र सिंह चौहान, उत्कृष्ट विद्यालय, खंडवा
ग्रेजुएशन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। खंडवा में भी ऐसे एकीकृत शैक्षणिक मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। मेधावी विद्यार्थी ऐसे कॉलेजों में प्रवेश चाहते हैं, जहां ग्रेजुएशन के साथ नीट, जेईई, बैंकिंग जैसे अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाएं भी उपलब्ध हों। यही कारण है कि वे बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं।
छात्र बोले--
अक्षय मोहिते, छात्र, गवर्नमेंट साइंस होल्कर कॉलेज
इंदौर के गवर्नमेंट साइंस होल्कर कॉलेज में प्रवेश लिया है। वहां बेहतर शैक्षणिक वातावरण और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। खंडवा के कॉलेजों में भी अनुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और प्रतिस्पर्धी माहौल विकसित किया जाना चाहिए।
कुल सीटें : 6030
प्रवेश : 2666
खाली सीटें : 3364
शासकीय कॉलेजों में प्रवेश (पीजी)
कुल सीटें : 1690
प्रवेश : 674
खाली सीटें : 1016
12 वीं परीक्षा 2025
कुल परीक्षार्थी : 8478
बालक : 3645
बालिकाएं : 5025
उत्तीर्ण : 7506
Updated on:
05 Jul 2026 11:46 am
Published on:
05 Jul 2026 11:46 am
