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पराली-भूसा-खरपतवार से चलेंगे वाहन, उड़ेंगे विमान, यहां लग रहा देश का पहला कमर्शियल ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट

खेतों के वेस्ट यानी कृषि अपशिष्ट से सीएनजी, एलएनजी और बायोहाइड्रोजन गैस बनेगी

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सीएनजी, एलएनजी और बायोहाइड्रोजन गैस बनेगी

खंडवा. सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही खंडवा में देश का पहला कमर्शियल ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट लगेगा। इसमें खेतों के वेस्ट यानी कृषि अपशिष्ट से सीएनजी, एलएनजी और बायोहाइड्रोजन गैस बनेगी। इस ईंधन से वाहन चलाए जा सकेंगे। इसका इस्तेमाल विमानों के ईंधन के रूप में भी किया जा सकेगा।

पुनासा तहसील के जलकुंआ गांव में 10 एकड़ जमीन की आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो -उद्यमियों ने प्लांट लगाने का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। प्रदेश सरकार की मदद से 60 करोड़ रुपए की लागत से प्लांट लगेगा। एमएसई विभाग ने इनवेस्टरों को हरीझंडी दे दी है। पुनासा तहसील के जलकुंआ गांव में 10 एकड़ जमीन की आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। जिले में एफपीओ फार्मर्स प्रोडक्शन आर्गेनाइजेशन के लिए नाबार्ड योजना बना रहा है।

डीडीएम नाबार्ड रवि मोरे ने बताया, प्रत्येक एफपीओ में 300-300 किसानों को रखा जाएगा। खंडवा, पुनासा में ये बनाए जा चुके हैं। खालवा और पंधाना में जल्द बना लिए जाएंगे।

डीआइसी के जिला महाप्रबंधक टीआर रावत बताते हैं कि इंदौर के कुछ उद्यमी समूह बनाकर व्यावसायिक ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट लगाने की तैयारी में है। प्रोजेक्ट प्रक्रिया में है।

इन उद्यमियों का दावा है कि इस प्लांट में खेतों की खरपतवार का इस्तेमाल होगा। कृषि अपशिष्टों से रोज एक टन क्रूड ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा। इसमें मीथेन, हाइड्रोजन, कार्बनडाइऑक्साइड और चारकोल अलग हो जाएगा। क्रूड ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग जेट विमान, रॉकेट, वायुयान के ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

तकनीक ईजाद करने वाले वैज्ञानिक के अनुसार, उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन 99.9प्रतिशत शुद्ध- तकनीक ईजाद करने वाले वैज्ञानिक के अनुसार, उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन 99.9प्रतिशत शुद्ध होगी। 24 रिएक्टर के इस प्लांट पर 100 लोगों को रोजगार मिलेगा। उनकी निजी कंपनी तैयार उत्पाद भी खरीदेगी। 15 टन कृषि अपशिष्ट (बायोमास- पराली, भूसा, सब्जियों के छिलके, पेड़-पौधों की पत्तियां, लकड़ी, पाम वेस्ट, फूल आदि) से साढ़े सात टन क्रूड हाइड्रोजन गैस तैयार की जा सकती है।

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