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सरकार दो फीसदी दे रही मुनाफा, फिर भी जनता को एक करोड़ रुपए अधिक चुकानी पड़ रही कीमत

वित्तीय वर्ष में 50 करोड़ रुपए से ज्यादा के स्टाम्प की खपत, ई-स्टाम्प के साथ मैन्युअल दस, बीस, पचास व 100 रुपए का बिक रहा स्टाम्प , वेंडरों की टेबल से खुलेआम ज्यादा रूपए की वसूली की जा रही है।

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खंडवा

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Rajesh Patel

Jun 10, 2022

Vendors selling judicial, non-judicial stamp paper in the collectorate for twice the price

stamp

राजेश पटेल

खंडवा जिले में ज्यूडिशियल नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प में वेंडर 20 फीसदी अधिक दाम में बेचा जा रहा है। सरकार स्टाम्प विक्रेताओं को डेढ़ से दो फीसदी कमीशन एडवांस दे रही है। बावजूद इसके कचहरी से लेकर तहसील तक स्टाम्प वेंडर और सर्विस प्रोवाइडर मनमानी कीमत वसूल रहे। फिर भी जिम्मेदार तमाशबीन बने हुए हैं। कचहरी परिसर में मैन्युअल और इ-स्टाम्प वेंडरों की टेबलें लगी हैं। गुरुवार को अवकाश के दिन भी 10-15 वेंडर टेबल पर स्टाम्प बेच रहे थे। छैगांव माखन क्षेत्र से कचहरी पहुंचे मोतीलाल वेंडर से 10 व 50 रुपए के स्टाम्प लेने पहुंचे। वेंडर ने बताया 10 रुपए का स्टाम्प 15 रुपए में और 100 रुपए का स्टाम्प110 रुपए का मिलेगा।

500 रुपए का इ-स्टाम्प 600 रुपए में बिक रहा

मोतीलाल विक्रेता से बोले, स्टाम्प ज्यादा लेना है। बुजुर्ग स्टाम्प वेंडर ने कहा 500 रुपए का इ-स्टाम्प 600 रुपए में बिक रहा है। ऑनलाइन वाले दस का इ-स्टाम्प 20 रुपए में बेच रहे। हम तो पुराने वेंडक हैं। इस लिए ज्यादा नहीं ले रहे हैं। ये कहानी अकेले मोतीलाल की नहीं बल्कि हर स्टाम्प खरीदार को अधिक कीमत चुकानी पड़ी रही है।

ऐसे समझें मनमानी

सरकार ज्यूडिशियल नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प में दो फीसदी एडवांस कमीशन दे रही है। उदाहरण सरकार 100 रुपए का स्टाम्प 98 रुपए में वेंडर को दे रही है। लेकिन वेंडर 100 रुपए का 110 रुपए में बेच रहे हैं। इस औसत से बीस फीसदी अधिक चार्ज वसूल रहे हैं। यदि इस औसत से वित्तीय वर्ष में स्टाम्प की हो रही खपत का औसत लिया जाए तो 50 करोड़ के स्टाम्प में एक करोड़ रुपए की अतिरिक्त चार्ज वसूल किया जा रहा है।

44 वेंडर बेच रहे स्टाम्प

कचेहरी से तहसील तक जिलेभर में मैन्युअल स्टाम्प 44 वेंडर अधिकृत हैं। जबकि 100 से ज्यादा सर्विस प्रोवाइडर इ-स्टाम्प बेच रहे हैं। मैन्युअल में दस, बीस, पचास और सौ के स्टाम्प बिक रहे है। कम कीमत के स्टाम्प शपथ पत्र आदि में लगाएजा रहे हैं। सौ से अधिक कीमत में ई-स्टाम्प उपयोग किया जा रहा है। जमीन की रजिस्ट्री में ई-स्टाम्प का उपयोग हो रहा है।


जमीन की रजिस्ट्री में हर साल 50 करोड़ से ज्यादा की खपत

बीते वित्तीय वर्ष में जमीन की रजिस्ट्रियों में 50 करोड़ रुपए से अधिक के स्टाम्प की खपत है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2020 से अब तक लगभग पांच करोड़ के मेन्युअल स्टाम्प से खजाने में जमा हुए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में दस, बीस, पचास व सौ रुपए के लगभग 62 लाख रुपए कीमत के स्टाम्प की बिक्री हो चुकी है।

जवाबदेही तय की जाएगी

ऐसी जानकारी नहीं है, अगर इस तरह शिकायत मिलती है तो वेंडरों की जवाबदेही तय की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।

प्रभात बाजपेयी, जिला पंजीयक