खंडवा.
नगर निगम परिसर में गुरुवार को बैंड बाजा, ढोल की आवाज सुनकर ऐसा लगा मानों कोई कार्यक्रम हो रहा है, लेकिन ये कोई आयोजन के लिए नहीं, बल्कि निगम अधिकारियों को जगाने के लिए बजाए जा रहे थे। दरअसल शहर में लावारिस पशुओं और आवारा कुत्तों के कहर से हर कोई परेशान है। बुधवार रात निगम नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर भी डॉग बाइट का शिकार हो गए। जिसके बाद गुरुवार उन्होंने अनोखा प्रदर्शन करते हुए निगम परिसर में बैंड बजवा दिए।
गुरुवार सुबह 11.30 बजे निगम नेता प्रतिपक्ष सहित कांग्रेस पार्षद, पदाधिकारी और कार्यकर्ता बैंड बाजे के साथ निगम कार्यालय पहुंचे। यहां परिसर में काफी देर बैंड बजाने के बाद भी कोई नहीं आया तो निगमायुक्त कक्ष के सामने गलियारे में बैठकर तालियां बजाते हुए भजन शुरू कर दिए। नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर का कहना था कि मूक-बघिर हो चुके सोए हुए अधिकारियों को जगाने के लिए बैंड बजाए, ताकि उनके कानों तक जनता की आवाज पहुंचे, लेकिन बैंड बाजा भी उन्हें जगा नहीं पाया। शहर सरकार बने एक साल हो गया है, लेकिन किसी भी पार्षद की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जनता के काम अटके पड़े हैं, हमारे पास अब रोने के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचा है।
एक भी जिम्मेदार नहीं मिला निगम में
कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष का विरोध प्रदर्शन यहां करीब एक से डेढ़ घंटे चला। इस दौरान कोई भी जिम्मेदार जन प्रतिनिधि, महापौर, निगम अध्यक्ष, निगमायुक्त, उपायुक्त तक ज्ञापन लेने नहीं आए। जिसके बाद प्रदर्शनकारी नेता बाहर आ गए। यहां एक कुत्ते को पकड़कर उससे नेता प्रतिपक्ष ने निवेदन किया कि अपनी प्रजाति को लेकर खुद ही शहर के बाहर चले जाए। प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस अध्यक्ष रचना तिवारी, पार्षद मनोज मंडलोई, पार्षद प्रतिनिधि हुकुम मेलुंदे, दिव्यांश ओझा, अरविंद कसेरा, कांग्रेस नेता यशवंत सिलावट, समीर खान, शराफत खान, उदय सोनी, मोइज खान, असलम गौरी, देवेंद्र थिटे, रिजवान सहित अन्य मौजूद थे।
तीन करोड़ खर्च कर बना एबीसी केंद्र कोई काम का नहीं
शहर में रोजाना आठ से दस लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे है। सड़कों पर टोलियों में विचरण करते आवारा कुत्ते झुंड बनाकर वाहन चालकों के पीछे भाग रहे है, जिससे दुर्घटनाएं भी हो रही है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक को कुत्ते अपना शिकार बना रहे है। नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि तीन करोड़ की लागत से श्वान बधियाकरण केंद्र बनाया, लेकिन कोई काम नहीं आ रहा है। कुत्तों की नसबंदी कर उन्हें फिर से उसी जगह छोडऩा है, लेकिन जब केंद्र ही बंद पड़ा है तो कार्रवाई कैसे होगी। वहीं, शहर में आवारा मवेशियों का भी जमावड़ा है। तीन माह पूर्व एक महिला की मौत भी आवारा सांड के हमले से हो चुकी है।
15 दिन में शुरू हो जाएगा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आवारा श्वान को पकड़कर अन्य जगह नहीं छोड़ा जा सकता। बधियाकरण कर उन्हें पुन: उसी स्थान पर छोडऩा है, जहां से उन्हें पकड़ा था। एबीसी केंद्र के टेंडर हो चुके है। 15 दिन में उसे शुरू कर दिया जाएगा। आवारा मवेशियों को पकडऩे का कार्य रोजाना किया जा रहा है।
नीलेश दुबे, निगमायुक्त