खंडवा.
मंडी में गेहूं के दाम लगातार कम होते जा रहे है। बुधवार को मंडी में 18 सौ से 2000 रुपए के बीच गेहूं की बोली लगी। भाव कम होने से किसान भड़क उठे और हंगामा शुरू कर दिया। व्यापारी नीलामी बंद कर चले गए तो किसानों ने मंडी कार्यालय के बाहर धरना दे दिया। किसानों की मांग थी कि समर्थन मूल्य के लगभग गेहूं खरीदा जाए। इस बीच किसान संगठनों के पदाधिकारी भी पहुंचे और भाव नहीं बढऩे पर मंडी पर ताला लगाने की बात भी कही।
पिछले 10 दिन पहले तक गेहूं का भाव 2800 रुपए क्विंटल तक था, इसके बाद मंडी में भाव गिरना शुरू हुए और बुधवार को 1800 रुपए क्विंटल में गेहूं बिका। किसानों ने भाव बढ़ाने की मांग की तो व्यापारी मना कर गए। जिसके चलते हंगामा शुरू हो गया। किसान एकजुट होकर मंडी कार्यालय पहुंचे और धरना शुरू कर दिया। किसानों का आरोप था कि मंडी प्रशासन और व्यापारियों की मिलीभगत के चलते किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है। निमाड़ संयुक्त कृषक संगठन के श्रवण पटेल, भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री शैलेंद्र सिंह जलोदिया, कोषायक्ष सुंदर पटेल भी यहां पहुंचे। मंडी सचिव ओपी खेड़े को हंगामे की जानकारी मिलने पर वह भी किसानों से चर्चा के लिए आए, लेकिन मामला व्यापारियों और किसानों का होने की बात कहकर कुछ भी करने से असमर्थता जताई।
तीन बजे शुरू हुई मंडी, 2200 तक पहुंचा भाव
किसान संगठनों के पदाधिकारियों, मंडी सचिव ने व्यापारियों को कार्यालय बुलाकर चर्चा की। व्यापारियों का कहना था कि केंद्र सरकार खुले बाजार में 2125 रुपए के भाव से गेहूं बेच रही है, वहां मंडी टैक्स, बारदान और भाड़े के रुपए भी बच रहे हैं। ऐसे में मंडी में ज्यादा भाव देकर खरीदी नहीं कर सकते। चर्चा के बाद भाव का अंतर कम करते हुए व्यापारियों ने खरीदी करने की बात कही। दोपहर 3 बजे बाद मंडी शुरू हुई और अधिकतम भाव 2216 रुपए तक पहुंचा। बुधवार को 13 हजार क्विंटल गेहूं की मंडी में आवक हुई।
करेंगे अनिश्चिकालीन बंद
सरकार किसानों के साथ छलावा कर रही हैं। ओपन मार्केट में गेहूं के दाम कर बेच रही हैं, जिसके कारण किसानों को नुकसान हो रहा है। दो दिन स्थिति देखेंगे, यदि किसानों को समर्थन मूल्य तक भाव नहीं मिलेगा तो अनिश्चितकालीन मंडी बंद की जाएगी।
सुभाष पटेल, उपाध्यक्ष भाकिसं
उचित दाम मिले, नहीं तो हड़ताल
किसानों को उचित दाम उनकी उपज का मिलना चाहिए। हमारी मांग है कि समर्थन मूल्य या 2125 रुपए क्विंटल न्यूनतम में खरीदी हो। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम हड़ताल करेंगे और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
जय पटेल, मीडिया प्रभारी निमाड़ संयुक्त कृषक संगठन
घाटे का सौदा नहीं कर सकते
सरकार ने निर्यात पर रोक लगा दी और एफसीआई के माध्यम से खुले बाजार में कम भाव में गेहूं बेच रही है। व्यापारी को वहां फायदा है, मंडी टैक्स, बारदान की भी बचत हो रही है। हम घाटे का सौदा नहीं कर सकते। मंडी में भाव ओर भी कम होने की संभावना है।
प्रशांत अग्रवाल, उपाध्यक्ष के्रता-विक्रेता संघ
खंडवा. मंडी कार्यालय के गेट पर विरोध दर्ज कराते किसान।