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प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस एसएन कॉलेज की दो छात्राओं का मॉडल उच्च शिक्षा विभाग ने तकनीकी शिक्षा में शामिल कर लिया है। गत दिनों राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में तीसरा पुरस्कार मिला है।
जलीय मार्गों को भी प्रभावित कर रही जलकुंभी
निमाड़ क्षेत्र में जलकुंभी जल स्रोतों के पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर रही है। इसकी वृद्धि से जलीय जीवों की आबादी प्रभावित होने लगी है। पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने के साथ जलीय जीवों के भोजन ओर उनके आश्रय पर असर पड़ रहा है। जलीय मार्गों को भी प्रभावित कर रहा है। यह बातें प्रधानमंत्री एक्सीलेंस एसएन कॉलेज में भौतिक शास्त्र विभाग के छात्रों ने प्रोजेक्ट तैयार किया है।
छात्राओं को दस-दस हजार रुपए से किया पुरस्कृत
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में छात्राओं का मॉडल तीसरे स्थान पर चयन किया गया हे। छात्राओं को आरजीपी विवि में प्रोजेक्ट को तृतीय पुरस्कार विजेता के रूप में 10-10 हजार रुपए के चेक दिए गए हैं।
कालेज ने छात्रों का किया उत्साह वर्धन
छात्राओं के प्रोजेक्ट का मॉडल राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सृजन कार्यक्रम रखा गया। जिसे तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं आयुष में शामिल कर लिया गया। एसएन कालेज की 10 प्रविष्टियां 11 व 17 अप्रेल को सृजन के वेबसाइट पर अपलोड किया गया। 30 अप्रेल को परिणाम आया। वनस्पति विभाग की छात्रा आलिया परवीन और प्रीति प्रचेता का चयन हुआ। 10 व 11 मई को आरजीपीवी विश्वविद्यालय में प्रदर्शन के लिए बुलाया गया । प्रोजेक्ट वेस्ट मैनेजमेंट पर था। डॉ शकुन मिश्रा ने बताया कि प्रोजेक्ट को तृतीय पुरस्कार मिला है। दोनों छात्राओं को चेक प्रदान किया गया है। डॉ अर्चना मोरे के नेतृत्व में आरजीपीवी विश्वविद्यालय में छात्राओं ने उत्तम प्रदर्शन किया। कालेज में प्राचार्य डॉ एसपी सिंह ने छात्राओं का उत्साह वर्धन किया। संयोजक डॉ नेहा सोलंकी सहायक प्राध्यापक भौतिक शास्त्र विभाग ने रूपरेखा बनाई थी।
बायोगैस से नष्ट होगी जलकुंभी
एसएन काॅलेज में वनस्पति विभाग की छात्रा प्रीति प्रचेता और आलिया परवीन ने प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसका प्रदर्शन आरजीपीवी विश्वविद्यालय में हुआ। छात्राओं ने प्रोजेक्ट में जल कुंभी को नष्ट करने बायोगैस प्लांट बनाया है। इसमें जलकुंभी को नष्ट करने का स्रोत बताया है। जलकुंभी के पौधों को पीसकर उसमें उतनी ही मात्रा में गोबर मिलाएं या जलकुंभी के पेस्ट में तनु अम्ल मिलकर घोल तैयार करके भी बायोगैस बना सकते हैं। उर्वरक बनाने में इसका उपयोग करके मृदा को नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस जैसे महंगे तत्वों से संतृप्त कर सकते है। यह ज्यादा खर्चीला नहीं है। वनस्पति विभाग की विभागाध्यक्ष डॉक्टर शकुन मिश्रा ने बताया कि बायोगैस के माध्यम से जलाशयों की सुरक्षा की जा सकती है। जल का स्तर बढ़ सकता है। जल विनाशकारी पौधे का सदुपयोग का सकते हैं।02:25 AM