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यहां पौधरोपण में ऐसा हुआ भ्रष्टाचार की अफसर भी पड़ गए गफलत में

पौधारोपण में भ्रष्टाचार जनपद स्तर की जांच से असंतुष्ट ग्रामीणों ने जिला पंचायत के दल से कराई पौधरोपण की जांच, सामने आया भ्रष्टाचार, छह गांवों में हुए पौधरोपण में मिली अनियमितता पर ग्रामीणों ने जवाबदारों पर की कार्रवाई की मांग, जिला पंचायत सीईओ को सौंपा आवेदन

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खरगोन

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Gopal Joshi

Dec 04, 2019

Corruption in Plantation

खरगोन. ऐसी स्थिति में है पौधरोपण।

खरगोन.
पौधरोपण के नाम पर २०१७ में पंचायत स्तर पर गांवों में पैसा पानी की तरह बहाया गया। पर्यावरण को सहेजने के तमाम वादे किए, लेकिन समय के साथ यह पौधरोपण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। ग्रामीणों ने पौधरोपण को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया और मामले की पड़ताल कराने के लिए अफसरों को आवेदन दिए। शिकायतों के आधार पर जनपद स्तर से पहले सभी छह गांवों में हुए पौधरोपण की जांच की गई, लेकिन इसमें जवाबदारों को क्लिनचीट दे दी गई। इस जांच से असंतुष्ट ग्रामीणों ने जिला पंचायत स्तर से जांच कराने की मांग की। इस बार जांच में वह परतें खुली जिसकी आशंका थी। जिला पंचायत के जांच प्रतिवेदन में सभी छह गांवों में पौधरोपण में हुई धांधली सामने आई है। अब ग्रामीणों ने इस आयोजन में लिप्त सभी अफसर-कर्मचारियों पर कार्रवाई व वसूली की मांग की है।
बुधवार को जिला मुख्यालय पर शिकायत लेकर आए ग्राम देवली के दशरथ राठौड़ व छतर नागराज ने बताया जिला पंचायत स्तर पर ग्राम देवली, उमरखली, कुम्हारखेउ़ा, कुकडोल, कोठा बुजुर्ग व कोठा खुर्द में पौधरोपण की शिकायत १५ अगस्त २०१७ से लगातार की जा रही थी। इन शिकायतों के आधार पर ३० नवंबर २०१७ को गोगांवा जनपद के अफसरों ने ग्रामीणों के समक्ष पौधों की गिनती की। इसमें ४८ पौधे जीवन मिले। लेकिन जब सीएम हेल्पलाइन पर निराकरण दिया तो इस दल ने वहां ८०० में से पचास प्रतिशत पौधे जीवित बताकर गलत जानकारी दी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस तरह अफसरों ने जिम्मेदारों को बचाने के लिए गलत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

असंतुष्ट ग्रामीणों ने फिर की शिकायत तो खुली पोल
जनपद स्तर पर पौधरोपण मामले में हुई जांच से असंतुष्ट होर छतर नागराज व दशरथ राठौड़ ने ग्रामीणों के साथ दो साल बाद यानी २६ फरवरी २०१९ को पुन: जांच की मांग करते हुए जनसुनवाई में आवेदन दिया। इसके आधार पर २३ मार्च २०१९ को सहायक यंत्री नीता चौहान ने पूरे मामले की फिर से जांच की। इसमें जो तथ्य सामने आए वह चौकाने वाले थे। इस जांच ने जनपद स्तर पर हुई जांच की भी पोल खोलकर रख दी।

दूसरी जांच में यह निकला निष्कर्ष
ग्राम पंचायत देवली : यहां पीएम आवास के हितग्राही जसवंत नवल की मृत्यु के बाद भी सचिव, सरपंच व रोजगार सहायक ने मस्टर पर उपस्थिति दर्ज की। उपयंत्री ने भी काम का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया। उक्त कृत्य घोर अनुशासनहीनता एवं लापरवाही पूर्वक है। यहां सरपंच, तत्कालीन सचिव व उपयंत्री की मिलीभगत से अनियमितता व लापरवाही के चलते सीसी सड़क व नाली निर्माण पर 2025000 राशि निष्फल है। यह वसूली योग्य है। इसी तरह पौधरोपण पर खर्च हुई 1083000 रुपए की राशि को वसूली योग्य बताया है।
ग्राम पंचायत उमरखली : यहां सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक व उपयंत्री की मिलीभगत से पौधरोपण में अनियमितता सामने आना बताया है। यहां पौधरोपण पर 160870 रुपए खर्च की गई राशि वसूली योग्य बताई है।
ग्राम पंचायत कुम्हारखेड़ा : यहां भी पंचायत स्तर पर हुए पौधरोपण में अनियमितता सामने आई है। यहां 209295 रुपए वसूली योग्य बताए गए हैं।
ग्राम पंचायत कुकडोल : यहां पौधरोपण पर ५९६१६ रुपए खर्च हुए यह राशि भी निष्कर्ष रिपोर्ट में वसूली योग्य दर्शाई गई है। पंचायत स्तर पर अनियमितता यहां भी सामने आई है।
ग्राम पंचायत कोठा बुजूर्ग : यहां सरपंच, तत्कालीन सचिव, रोजगार सहायक व उपयंत्री ने पौधरोपण में अनियमितता की। इस काम पर ७२२९०५ रुपए खर्च हुए जो वसूली योग्य है।
ग्राम पंचायत कोठा खुर्द : यहां भी पंचायत स्तर पर पौधरोपण में लापरवाही होना सामने आया है। यहां १०६५२२ रुपए वसूली योग्य बताए गए हैं।

इन पर लटकी कार्रवाई की तलवार
उक्त मामले में जांच रिपोर्ट के आधार यह स्पष्ट हुआ है कि सभी ६ ग्राम पंचायतों के उपयंत्री, सचिव, जीआरएस व सरपंच पर शासकीय राशि के दुरुपयोग किए जाने जैसे आसार है। संबंधितों पर वित्तीय अनियमितता किए जाने से अनुशासनात्मक कारवाई हो सकती है।