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एेसा क्या घुल रहा पानी में कि इनकी जान पर बन आई

गुंदोलाव झील में दिनों-दिन घट रहा है जलस्तर, झील में मछलियों के लिए डाली जा रही खाद्य सामग्री
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किशनगढ़

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dinesh sharma

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Updated: 17 May 2019, 6:04 AM IST

Water level is decreasing day by day in Gundalaw lake

एेसा क्या घुल रहा पानी में कि इनकी जान पर बन आई

मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर). शहर की गुंदोलाव झील में दिनों-दिन घटते जलस्तर और खाद्य सामग्री डाले जाने के कारण जल की रानी के जीवन पर जल में ही संकट मंडराने लगा है। झील में मछलियों के लिए खाद्य सामग्री डालने के कारण स्थिति विकट होती जा रही है। स्थिति यह है कि अब पानी में से भी बदबू आने लगी है।


नगर की ऐतिहासिक गुंदोलाव झील का गर्मी बढऩे के साथ ही जल स्तर घटता जा रहा है। स्थिति यह है कि जगह-जगह से जमीन दिखाई देने लगी है। वहीं गुंदालोव झील के किनारे काश्तकारों ने चारे आदि की बुवाई भी कर दी है। जल स्तर घटने से मछलियों पर भी जल संकट गहराने लगा है। झील में हजारों मछलियां है।

नगर परिषद की ओर से झील से मछलियां पकडऩे पर भी रोक लगा रखी है। इस कारण मछलियों की तादात बढ़ती जा रही है और जल स्तर घटता जा रहा है। झील में फूल-महल के आस-पास ही पानी गहरा है। यहीं पर कुछ अस्थायी दुकानदार दुकान लगाकर बैठे है। यहां पर आने वाले लोगों को ब्रेड, मुरमुरे, सोयाबीन, आटे की गोलियां सहित कई खाद्य पदार्थ झील में डालते हैं। इससे हालत खराब होते जा रहे है। इसके बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

पुण्य नहीं हो रहा है पाप


गुंदोलाव झील आने वाले लोग पुण्य कमाने के लिए मछलियों को खाद्य सामग्री डालते हैं, जबकि इससे मछलियों को नुकसान हो रहा है। झील में डाली गई खाद्य सामग्री का आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में नीचे चला जाता है। इससे पानी दूषित होता है और ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे मछलियों के जीवन पर भी संकट गहराने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

15 किलो तक की है मछलियां


झील में 500 ग्राम से 15 किलो तक की मछलियां हैं। मछलियां पकडऩे पर रोक होने के कारण इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। हालांकि रात्रि के समय झील से चोरी-छिपे मछलियों को पकड़ते युवकों को पकड़ा गया है। उनके जाल आदि भी जला दिय गए हैं।

वोटिंग पर भी पड़ा असर

गुंदोलाव झील में पानी की कमी के कारण वोटिंग पर भी असर पड़ा है। अब वोटिंग करने वालों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इससे ठेकेदार को भी नुकसान हो रहा है। आगामी दिनों में गर्मी के कारण पानी और कम होने पर स्थिति विकट हो सकती है।