
जन्म के बाद जिस बेटी को दफना दिया, उसने किया दुनिया में नाम रोशन
कोलकाता. (शिशिर शरण राही). जन्म के बाद जिसे जमीन में जिन्दा गाड़ दिया गया, उसने न केवल भारत बल्कि अमरीका समेत दुनिया के 165 देशों में भारत का नाम रोशन किया। यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, न ही किसी टीवी सीरियल का दृश्य है, बल्कि राजस्थान की विश्वविख्यात कालबेलिया नृत्यांगना पद्मश्री गुलाबो सपेरा की जिंदगी की कड़वी सच्चाई है। राजस्थान के अजमेर जिले के कोटड़ा गांव में सपेरा समुदाय में जन्मी गुलाबो ने राजस्थान पत्रिका से शुक्रवार रात कोलकाता मेंखास बातचीत में अपनी जिंदगी के कई अनछुए पहलुओं को साझा किया। गुलाबो ने कहा कि महज 7 साल की उम्र में ही उन्होंने कालबेलिया नृत्य करना शुरू कर दिया था। सवालों के जवाब में उन्होंने बताया कि वे अपने माता-पिता की संतानों में चौथे नंबर की पुत्री थीं। गुलाबो ने बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर खास जोर देते हुए कहा कि बेटियां ही किसी भी सभ्य समाज की निर्माता होती हैं। उन्होंने माता-पिता से यह शपथ लेने का आह्वान किया कि वे अपनी बेटियों को कभी नहीं मारेंगे। उनके निर्देशन में प्रशिक्षण प्राप्त हजारों लड़कियां आज विदेशों में नाम रोशन कर रही हैं। 2016 में पद्मश्री से सम्मानित गुलाबो ने कहा कि फिलहाल पुष्कर में वे एक स्कूल का निर्माण करा रही हैं, जिसमें बच्चियों को राजस्थान के लोकनृत्य, कला-संस्कृति, शिक्षा-दीक्षा के साथ-साथ कम्प्यूटर आदि की भी शिक्षा दी जाएगी ताकि परंपरा, और हमारी संस्कृति बरकरार रहने के साथ-साथ घर-घर में एक गुलाबो पैदा हो। गुलाबो ने कालबेलिया डांस को ऐसी पहचान दिलाई कि आज देश नहीं बल्कि विदेशों में भी लोग कलबेलिया नृत्य को जानने लगे हैं। सबसे पहले वे 1985 में अमरीका के दौरे पर गई थीं, जहां अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था।
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गरीबी में गुजरा था बचपन
गुलाबो ने कहा कि वे ऐसे समुदाय में पैदा हुई थीं जहां लोग सांप दिखाने का काम करते थे। वे भी पिता के साथ गांव-गांव जाकर कालबेलिया नृत्य करती थी। पुष्कर मेले में राजस्थान सरकार की तत्कालीन अधिकारी तृप्ति पांडेय और हिम्मत सिंह ने उनका नृत्य देखा, इसके बाद उन्हें अनेक आयोजनों में शिरकत करने की पेशकश मिली। गुलाबो का बचपन गरीबी में गुजरा, जब उन्होंने इस नृत्य की शुरुआत की तो उस समय लोग इसके बारे में ज्यादा जानते नहीं थे। धीरे-धीरे उनके काम को पहचान मिली और वे शो करने लगीं। अपने नाम के बारे में गुलाबो ने कहा कि उनके पिता ने नाम गुलाबो रखा था।
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क्या है कालबेलिया नृत्य
कालबेलिया राजस्थान के एक समुदाय का नाम है जो संपेरे होते हैं। गुलाबो के पिता भी यही काम करते थे और गुलाबो उनके साथ बाहर जाती थीं। गुलाबो के पिता बीन बजाते थे और वह नाचती थीं। कालबेलिया नृत्य सिर्फ महिलाएं करती हैं और इसमें वह सांप की तरह लहराती--बलखाती हैं। गुलाबो कई बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। इनमें बंटवारा, क्षत्रिय, अजूबा फिल्म मुख्य हैं। इसके अलावा वे बिग बॉस टीवी शो की मेहमान भी रह चुकी हैं।
Published on:
28 Dec 2019 10:48 pm
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