
Mamta Banerjee Birthday: बंगाल की सीएम ममता बनर्जी 5 जनवरी को पैदा नहीं हुई हैं, पर यह उनका जन्मदिन हैं। (Photo-IANS)
Mamta Banerjee Birthday: वह साल 1987 का था। राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। ममता बनर्जी सांसद और युवा कांग्रेस की महासचिव थीं। राजीव ने सांसदों के लिए एक प्रशिक्षण शिविर आयोजित करवाया। जगह तय की नैनीताल (तब उत्तर प्रदेश और अब उत्तराखंड में)। ममता को भी नैनीताल पहुंचना था, लेकिन वहां जाने से पहले अचानक उन्होंने अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जाने का प्लान बना लिया। इस यात्रा में वह बाल-बाल बचीं।
सुबह 10 बजे वह दो साथियों (परेश पाल, कृष्णा) के साथ दिल्ली से जीप में निकल गईं। रात आठ बजे अजमेर पहुंचीं और सीधे दरगाह पर गईं। वहां सजदा किया, चादर चढ़ाई और फौरन दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। आधी रात तक सभी को नींद आने लगी। बीच-बीच में ममता ड्राइवर को जगातीं, थोड़ी देर के लिए सब रुकते और फिर चल पड़ते। इसी बीच एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। किसी तरह सुबह छह बजे तक उनकी दिल्ली वापसी हुई। यह ममता बनर्जी की पहली अजमेर यात्रा थी।
बता दें कि ममता पर विरोधी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते रहते हैं और उन्हें समय-समय पर इसकी काट के लिए कुछ न कुछ करते रहना पड़ता है।
ममता बनर्जी ने आत्मकथा में स्कूल से जुड़ी एक घटना बयान की है। एक बार उनकी चाची बीमार हो गई थीं। उन्हें स्कूल से वापस जाना पड़ा। वह अपनी कुछ दोस्तों के साथ स्कूल से लौट रही थीं। रास्ते में उनकी दोस्त अपने बॉयफ्रेंड्स से बात करने के लिए रुक गईं। ममता लिखती हैं, ‘मैं इतना डर गई कि घर की ओर भागी। मैं बॉयफ्रेंड का मतलब भी नहीं जानती थी।’
ममता बनर्जी और बरसात का एक अजीब रिश्ता है। और, इस रिश्ते के पीछे एक कहानी है। यह कहानी ममता ने आत्मकथा My Unforgettable Memories में बयां की है। उन्होंने बताया है कि जिस दिन उनका जन्म हुआ उसके तीन दिन पहले से ही घनघोर बरसात हो रही थी, लेकिन उनके जन्म के वक्त बारिस रुक गई। वह लिखती हैं- शायद इसीलिए बरसात का मेरी ज़िंदगी में अहम रोल रहा। मैं जब भी कुछ नया या बड़ा करने जाती हूं तो बरसात हो ही जाती है। भले बूंदाबांदी ही हो। इस सिलसिले में ममता ने रेल मंत्री के दिनों की एक घटना का भी जिक्र किया है।
ममता बताती हैं कि बतौर रेल मंत्री नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उन्हें रामकृष्ण मिशन वालों के बुक स्टॉल का उद्घाटन करना था। बाहर खिली हुई धूप थी, लेकिन कार्यक्रम शुरू होते ही वर्षा होने लगी। मिशन के स्वामी जी भी हैरान हो गए और बोले, ‘लगता है मैंने जो सुना है, वह सच ही है। आप कुछ भी करती हैं तो इंद्र देव का आशीर्वाद मिल ही जाता है।’ ममता बताती हैं कि कार्यक्रम खत्म होते ही फिर से वैसी ही धूप हो गई। बकौल ममता, वर्षा हुए बिना उनका कोई काम सफल ही नहीं हो सकता।
ममता बचपन में पड़ोस के बच्चों के साथ गिल्ली डंडा खेलती थीं और हुगली नदी में तैराकी भी करती थीं। वह गुड़ियों से भी खेला करती थीं और हर हफ्ते अपनी गुड़िया की शादी करवाती थीं। शादी के नाम पर लुच्ची (रोटी से भी बड़े आकार की पूड़ी) पूड़ी और आलू दम का भोज करती थीं।
5 जनवरी, 1955 ममता बनर्जी का सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मदिन है। यह उनकी असल उम्र से पांच साल ज्यादा है। ममता ने My Unforgettable Memories में इसके पीछे का सच और असली जन्मदिन भी बताया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने किताब में लिखा है, 'उसने (ममता की मां) मुझे बताया कि स्कूल की फ़ाइनल परीक्षा के वक्त मैं 15 साल की भी नहीं थी। कम उम्र होने के चलते मैं परीक्षा में बैठने के अयोग्य करार दी जाती। इसलिए पिताजी ने जन्म की फर्जी तारीख और उम्र दर्ज करा कर समस्या का हल निकाला। नतीजा हुआ कि मुझे नया जन्मदिन मिल गया और असली उम्र भी पांच साल बढ़ गई।' उन्होंने बताया कि उनका असली जन्मदिन 5 अक्तूबर है। यह उन्हें मां गायत्री देवी से मिली एक पुरानी कुंडली से पता चला। उनकी मां दुर्गा पूजा की अष्टमी को उनका जन्मदिन मनाती थीं।
ममता ने यह भी लिखा है कि पांच जनवरी को सभी उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हैं, लेकिन उन्हें बधाई लेना अच्छा नहीं लगता। वैसे वह जन्मदिन मनाती भी नहीं हैं। फिर भी, लोग बधाई तो देते ही हैं। इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई हस्तियों ने उन्हें बधाई दी।
ममता के पिता 42 साल की उम्र में ही मर गए थे। वह नौ दिन से अस्पताल में थे। उनके गैस्ट्रिक अल्सर का ऑपरेशन हुआ था। डॉक्टर्स ने कहा कि 48 घंटे बाद वह खतरे से बाहर हो जाएंगे। दो दिन घर में सबकी सांस अटकी रही। 48 घंटे बीत गए तो सब की जान में जान आई। उनकी मां ने नहा-धो कर अच्छी सी साड़ी पहनी। खाना खाने के बाद दोपहर में मां और ममता आराम करने चली गईं। ढाई बजे अचानक मां उठीं और ममता के बाल संवारने लगीं। ममता ने हैरानी से पूछा, ‘अस्पताल तो चार बजे जाना है, फिर अभी क्यों!’ मां ने कहा, ‘मैंने अभी-अभी तुम्हारे बाबा को देखा और उनसे बात की। वह कह रहे थे- मैं जा रहा हूं, बच्चों का ख्याल रखना।’ अगले ही पल अस्पताल से बड़े भाई का फोन आया- बाबा नहीं रहे।
बाबा ममता को ‘मोनाबाबा’ कह कर पुकारते थे। वह रोज उनसे मिलने अस्पताल नहीं जा पाती थीं। जब जातीं तो वह पूछते- तुम मुझसे मिलने क्यों नहीं आती मोनाबाबा? ममता कहतीं- मां यहां होती हैं, मैं भी आ जाऊंगी तो घर पर छोटे भाई-बहन को देखने के लिए कोई नहीं रह जाएगा। उनके अंतिम समय में मां भी पास नहीं थीं।
ममता ने अपने राजनीतिक जीवन से जुड़ा एक और वाकया बयां किया है। यह किस्सा 7 जनवरी, 1993 का है। तब ममता केंद्र सरकार में मंत्री थीं। पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु मुख्यमंत्री थे। सुनने और बोलने से लाचार नादिया की एक लड़की का बलात्कार हुआ था। ममता उसे लेकर ज्योति बसु से मिलने उनके दफ्तर गईं। बसु ने मिलना तो दूर, उन दोनों को निकाल बाहर करवा दिया। उन्हें राइटर्स बिल्डिंग से घसीट कर बाहर निकाला गया और लाल बाजार स्थित पुलिस मुख्यालय ले जाया गया। ममता लिखती हैं, ‘उसी दिन मैंने कसम खा ली थी कि अब राइटर्स बिल्डिंग में जब भी आऊंगी, शान के साथ आऊंगी।’ उसके बाद 2011 में वह सीएम बनकर ही उस बिल्डिंग में दाखिल हुईं।
ममता ने अपनी आत्मकथा में कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा एक बार जानलेवा हमला किए जाने की बात भी लिखी है। 1990 में हुए इस हमले में उनके सिर पर गहरी चोट लगी थी।
ममता बनर्जी पहली बार 1984 में सांसद (कांग्रेस से) बनीं, लेकिन राजनीति में 1970 के दशक में ही आ गई थीं। एक बार लोकनायक जयप्रकाश नारायण का रास्ता रोकने के लिए वह उनकी कार के बोनट पर चढ़ कर नाचने लगी थीं।
ममता बनर्जी लिखती और पेंटिंग भी करती हैं। उन्होंने 20 से ज्यादा किताबें लिखी हैं और 5000 से भी अधिक ऑयल पेंटिंग्स बनाई हैं। वह कविताएं भी लिखती हैं।
ममता बनर्जी सात बार सांसद और कई बार केंद्र में मंत्री रहीं। 20 मई, 2011 से वह लगातार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं। लेकिन, उनकी संपत्ति आज भी अपेक्षाकृत कम ही है। 2021 के चुनाव में दिए हलफनामे में उन्होंने 15 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की थी।
Updated on:
05 Jan 2026 06:02 pm
Published on:
05 Jan 2026 05:42 am
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