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NCERT की क्लास 8 की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र, 5.33 करोड़ पेंडिंग केस को भी किया शामिल

एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र है। ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नामक चैप्टर में न्यायाधीशों पर कैसे कार्रवाई होती है, यह भी बताया गया है। पढ़ें पूरी खबर...
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भारत

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Pushpankar Piyush

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Updated: 24 Feb 2026, 10:00 AM IST

8वीं किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र (फोटो- @palmurukan)

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानि NCERT ने कक्षा 8वीं की नई सोशल साइंस की किताब जारी की है। इसमें लोकतंत्र के महत्वपूर्ण तीन अंगों में से एक न्यायपालिका की भूमिका समझाने के साथ-साथ एक नया हिस्सा भी जोड़ा गया है। जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और करोड़ों पेंडिंग केसों का जिक्र है। नई किताब के जारी होने के बाद इस पर बहस भी छिड़ गई है, क्योंकि पुरानी किताब में इन बातों का उल्लेख नहीं किया गया था।

क्या है नई किताब में?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, NCERT की नई किताब में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नामक चैप्टर में बताया गया है कि अदालतों को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही, कोर्ट में व्याप्त भष्ट्राचार की घटनाओं का भी जिक्र किया गया है।

किताब में 5.53 करोड़ पेंडिंग केसों का भी जिक्र किया गया है। इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं। जैसे कि जजों की कमी, कानूनी प्रक्रिया का जटिल होना और अदालतों में सही इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव। किताब में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में करीब 81 हजार केस पेंडिंग हैं। देश भर के उच्च न्यायालयों में 4 करोड़ 70 लाख केस पेंडिंग हैं। किताब में बताया है कि इन पेंडिंग केस के चलते कोर्ट पर भारी दवाब है।

आचार संहिता से बंधे होते हैं न्यायाधीश

बच्चों को बताया गया है कि जज एक आचार संहिता से बंधे होते हैं। उन्हें कोर्ट रूम के भीतर और बाहर सही आचरण रखना होता है। यदि किसी न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत होती है तो उसकी जांच की व्यवस्था है। इसके लिए ‘Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System (CPGRAMS)’ नाम का सिस्टम बनाया गया है। किताब में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि साल 2017 से 2021 के बीच 1600 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई थी। किताब में बताया गया है कि अगर आरोप बहुत ज्यादा गंभीर हो तो उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के खिलाफ संसद में महाभियोग लाया जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी जांच के बाद ही शुरू होती है और उक्त न्यायाधीश को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाता है।

किताब में पूर्व जस्टिस गवई का भी किया गया है जिक्र

किताब में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई के बयान का भी जिक्र किया गया है। गवई ने 2025 में कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भी भ्रष्टाचार और गलत आचरण की घटनाएं सामने आई हैं। इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है। इन मामलों में पारदर्शी और सख्त कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि लोगों का विश्वास दोबारा मजबूत हो सके।

पुरानी किताब में क्या था?

पुरानी किताब में न्यायपालिक की भूमिका, स्वतंत्र न्यायपालिका का मतलब, अदालतों की संरचनाओं व लोगों की पहुंच के बारे में जानकारी दी गई थी। पुरानी किताब में पेंडिंग मामलों का जिक्र जरूर था, लेकिन न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टचार को लेकर कोई बात नहीं कही गई थी। पुरानी किताब में ‘Justice delayed is justice denied’ न्याय में देरी, न्याय से वंचित की बात भी समझाई गई थी।

चुनावी बॉन्ड और IT एक्ट का उदाहरण भी दिया गया

एनसीईआरटी की किताब में चुनावी बॉन्ड और आईटी एक्ट का उदाहरण भी दिया गया है। इस पर छात्रों से चर्चा करने को कहा गया है। किताब में जिक्र है कि साल 2018 में केंद्र सरकार ने चुनावी बॉन्ड योजना शुरू की थी, जिसके जरिए लोग और कंपनियां राजनीतिक पार्टियों को गुप्त रूप से चंदा दे सकते थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था। SC ने कहा था कि मतदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि किस पार्टी को कौन पैसा दे रहा है।

साथ ही, किताब में आईटी एक्ट 2009 का भी जिक्र किया गया है। इसमें एक प्रावधान ऐसा था कि सोशल मीडिया या इंटरनेट पर पोस्ट करने पर जेल हो सकती थी। इस प्रावधान को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इस पर सुनवाई करते हुए उसे हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा था कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है।

कपिल सिब्बल का तंज

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र होने पर वरिष्ठ वकील व राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने तंज कसा है। उन्होंने X पर लिखा, इसमें एक सेक्शन है: ज्यूडिशियरी में करप्शन! इनके बड़े करप्शन का क्या: पॉलिटिशियन, जिसमें मिनिस्टर भी शामिल हैं, पब्लिक सर्वेंट, इन्वेस्टिगेशन एजेंसी और सरकारें उन्हें क्यों दबा देती हैं!

NCERT, अब न्यू एजुकेशन पॉलिसी व नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के अनुसार नई किताबें तैयार कर रहा है। अब तक कक्षा 1 से कक्षा 8 तक की किताबें जारी की जा चुकी हैं। पुरानी किताबें 2005 के करिकुलम पर आधारित थीं।