पश्चिमी बंगाल का पुरुलिया जिला, जिसे अपनी लाल मिट्टी के लिए जाना जाता है, होली के दौरान 'पलाश' के केसरिया फूलों से लकदक हो जाता है। यहाँ की होली को 'बसंत उत्सव' या 'पलाश उत्सव' के रूप में मनाया जाता है। यहाँ कृत्रिम रंगों का स्थान पलाश के फूलों से बना प्राकृतिक रंग लेता है। गांव के लोग इन फूलों को इकट्ठा कर रंग तैयार करते हैं। पुरुलिया की होली का असली आकर्षण यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व प्रसिद्ध 'छऊ नृत्य' है। भारी-भरकम मुखौटे पहनकर जब कलाकार 'महिषासुर मर्दिनी' या 'रामायण' के प्रसंगों पर ढोल-नगाड़ों की थाप पर हवा में छलांग लगाते हैं, तो पर्यटक मंत्रमुग्ध रह जाते हैं। शाम होते ही महुआ के पेड़ों के नीचे 'झूमुर' गीतों की महफिल सजती है।