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बिहार में राज्य प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत दस्तावेज़ बंगाल में क्यों अस्वीकार किए जा रहे

मुख्यमंत्री ममता ने राज्य सचिवालय में आयोजित संवाददाता सम्मलेन में बोला हमला कोलकाता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य सचिवालय नवान्न में आयोजित संवाददाता सम्मलेन में चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने निवास प्रमाणपत्रों को लेकर आयोग की ‘दोहरी नीति’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में राज्य प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत दस्तावेज़ […]

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मुख्यमंत्री ममता ने राज्य सचिवालय में आयोजित संवाददाता सम्मलेन में बोला हमला

कोलकाता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य सचिवालय नवान्न में आयोजित संवाददाता सम्मलेन में चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने निवास प्रमाणपत्रों को लेकर आयोग की 'दोहरी नीति' पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में राज्य प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत दस्तावेज़ बंगाल में क्यों अस्वीकार किए जा रहे हैं। उन्होंने आयोग की कार्रवाई को 'तुग़लकी' बताते हुए सात राज्य अधिकारियों के निलंबन पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया और आरोप लगाया कि आयोग 'दिल्ली के जमींदारों' के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 9 फरवरी 2026 को आदेश दिया था कि ईआरओ और एईआरओ को 14 फरवरी के बाद कम से कम एक सप्ताह का समय दिया जाए ताकि वे जांच पूरी कर सकें और उचित निर्णय ले सकें। इसके बावजूद पोर्टल पर ‘टेक एक्शन’ विकल्प बंद कर दिया गया, जिससे अधिकारी मामलों का निपटारा या आदेश अपलोड करने में असमर्थ हो गए। इस तरह की व्यवस्था न्यायिक अधिकार और चुनावी प्रक्रिया दोनों को कमजोर करती है।

प्रक्रिया में खामियों पर आपत्ति जताई

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआइआर प्रक्रिया में खामियों पर आपत्ति जताई और कहा कि रातोंरात 'तार्किक विसंगतियों' की नई श्रेणी बनाई गई और 1.36 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया। मामूली असंगतियों या पते में बदलाव को लेकर मतदाताओं को परेशान किया गया, जिसमें हाशिए पर रहने वाले समुदायों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी स्पष्ट कानूनी आधार के बंगाल में माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए, जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी नहीं है। इन पर्यवेक्षकों को पोर्टल पर बैकएंड एक्सेस दिया गया, जिससे मतदाता सूची से नाम हटाने की सुविधा मिल गई। ममता ने आरोप लगाया कि ईसीआई-स्वीप की कार्यप्रणाली पहले से ही भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की कोशिश करती दिख रही है।

बांग्लादेश चुनाव से की तुलना

मुख्यमंत्री ने भारत और बांग्लादेश की चुनावी प्रक्रिया की तुलना करते हुए कहा कि बांग्लादेश में चुनाव अपेक्षाकृत शांति से संपन्न हुए, जबकि भारत में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण स्थिति अस्थिर बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया का उपयोग अल्पसंख्यकों, गरीबों और युवाओं के अधिकार छीनने के लिए किया जा रहा है और इसे 'तार्किक विसंगतियों' के नाम पर लागू किया जा रहा है।
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के राजनीतिक भविष्य पर बोलते हुए ममता ने भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी व्यक्तियों का उपयोग अपने हितों के लिए करती है और बाद में उन्हें असहाय छोड़ देती है। उन्होंने चेतावनी दी कि उनकी पार्टी संवैधानिक लोकतंत्र में विश्वास करती है, लेकिन यदि जनता के अधिकार चुनाव से पहले छीने गए तो वे प्रतिरोध करने से पीछे नहीं हटेंगे।

खुले स्थानों पर मांस बिक्री पर रोक लगाने के फैसले की आलोचना

मुख्यमंत्री ममता ने भाजपा और नीतीश कुमार द्वारा बिहार में खुले स्थानों पर मांस बिक्री पर रोक लगाने के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्देश केवल प्रशासनिक आदेश नहीं हैं, बल्कि लोगों की खानपान आदतों और व्यक्तिगत पसंद में हस्तक्षेप का प्रयास हैं। ममता ने कहा कि बंगाल हमेशा विविधता का सम्मान करता है और यहां किसी को खाने की आदतें तय करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।