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‘समय का धर्म-साधना में करें सदुपयोग’

लेकटाउन में सप्तदिवसीय भागवत कथा ज्ञानयज्ञ की पूर्णाहूति

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‘समय का धर्म-साधना में करें सदुपयोग’

कोलकाता. समय का हमेशा धर्म और साधना में सदुपयोग करना चाहिए, क्योंकि अगर दुरूपयोग किया तो पछतावा कर कुछ नहीं होगा। इसलिए आने वाले समय को सुंदर बनाने के लिए अपनी पीढ़ी को धर्म से जोडऩा चाहिए। ईस्ट कोलकाता नागरिक फाउण्डेशन के लेकटाउन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन राधेश्यामजी शास्त्री ने यह उद्गार व्यक्त किए। कृष्ण और रुक्मणी विवाह का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि नरकासुर ने करीब 16 हजार कन्याओं को बंदी बना रखा था। नरकासुर का वध कर कृष्ण ने कन्याओं को बंधन मुक्त कराया। समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा के सहयोग से कृष्ण ने इन सभी कन्याओं से विवाह कामनावश नहीं करुणावश किया। कृष्ण और सुदामा की मित्रता का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि कृष्ण सुदामा के एक सच्चे मित्र साबित हुए जिन्होंने गरीब सुदामा की बुरे वक्त में सहायता की। भक्तों को उन्होंने नकारात्मकता का त्याग कर सकारात्मक जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि परिवार में सुख-शांति के लिए शान्ति, धैर्य और संयम का साथ रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने धर्म की कद्र नहीं करते, जबकि विदेशी लोग सनातन धर्म के प्रभाव को शिरोधार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुरे व्यसनों का त्याग कर देना चाहिए। संतोष, महेश, उमेश अग्रवाल परिवार ने व्यासपीठ का पूजन किया। चेयरमैन हरिकिशन राठी, वाइस चेयरमैन जगदीश प्रसाद जाजू, अध्यक्ष प्रीतम दफ्तरी, सचिव अशोक भरतिया, पीएल खेतान, मनोज बंका, प्रकाश राजाजी, किशन लोहारूका, विनोद सर्राफ, दिलीप सर्राफ, विनोद डालमिया, श्रीराम अग्रवाल, पवन अग्रवाल, अशोक अग्रवाल,गंगा प्रसाद चौधरी सहित महिला समिति सक्रिय रहीं। संचालन कथा संयोजक प्रकाश चण्डालिया ने किया।