5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

icon

प्रोफाइल

यहां तनाव नहीं, जवानों ने दी एक-दूजे को बधाई और मिठाइयों का हुआ आदान-प्रदान

BSF JAWANS CELEBRATED DIWALI AT INDO--BANGLADESH BORRDER---भारत-बांग्लादेश सीमा पर जवानों ने 1,100 दीप जला मनाई दिवाली, एक-दूसरे को दी शुभकामनाएं, आयोजन समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट और तेरापंथ युवक परिषद उत्तर हावड़ा ने किया

2 min read
Google source verification
यहां तनाव नहीं, जवानों ने दी एक-दूजे को बधाई और मिठाइयों का हुआ आदान-प्रदान

यहां तनाव नहीं, जवानों ने दी एक-दूजे को बधाई और मिठाइयों का हुआ आदान-प्रदान

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के पेट्रापोल/बनगांव. भारत-बांग्लादेश सीमा पेट्रापोल पर तैनात बीएसएफ (बीएसएफ) जवानों ने दिवाली मनाई। हर साल की तरह इस साल भी यहां खास अंदाज में दिवाली का जश्न मना। इसका आयोजन समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट और तेरापंथ युवक परिषद उत्तर हावड़ा ने किया था। कार्यक्रम के दौरान दोनों ओर से आपस में मिठाइयों का आदान-प्रदान हुआ। जवानों ने 1, 100 दीप जला दिवाली मनाई और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट और तेरापंथ युवक परिषद के सदस्यों ने जवानों को मिठाई खिलाकर दिवाली की बधाई दी। बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तेरापंथ युवक परिषद के अशोक डागा, राजेश सेठिया, संदीप डागा, किशन भोजक, रविकांत पांडे, राजेश तिवारी, स्वाति सिंह और पूनम खेमका आदि उपस्थित थे।

दिवाली अर्थात रोशनी का त्योहार

दिवाली अर्थात रोशनी का त्योहार शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्योहारों में से एक है दिवाली। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्तव है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते है तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्रीराम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी।


बड़ी खबरें

View All

कोलकाता

पश्चिम बंगाल

ट्रेंडिंग