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SIR In West Bengal: बंगाल में इन लोगों को भी मिल गई बड़ी छूट, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए नहीं दिखाना है कोई दस्तावेज

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया चल रही है। चुनाव आयोग ने बिरहोर, टोटो और सबर आदिवासी जनजातियों के वोटरों को फाइनल वोटर लिस्ट में स्वतः शामिल करने का फैसला किया है।

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छत्तीसगढ़ की Voter List में फिर जुड़ेंगे नाम! 27 लाख हटे, 2.74 लाख मतदाताओं ने दोबारा कराया पंजीयन...(photo-patrika)

छत्तीसगढ़ की Voter List में फिर जुड़ेंगे नाम! 27 लाख हटे, 2.74 लाख मतदाताओं ने दोबारा कराया पंजीयन...(photo-patrika)

West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है।

इस बीच, भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में तीन 'आदिवासी जनजातियों' या 'आदिम जनजातियों' के वोटरों को फाइनल वोटर लिस्ट में स्वतः शामिल करने का फैसला किया है।

इन तीनों समुदायों के वोटरों को इसके लिए कोई डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं होगी। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के ऑफिस के सूत्रों के अनुसार, बिरहोर, टोटो और सबर जैसी आदिवासी जनजातियों के वोटर बिना किसी पहचान पत्र के फाइनल वोटर लिस्ट में खुद शामिल हो जाएंगे।

अधिकारियों को क्या मिला निर्देश?

कमीशन के निर्देश के बाद, जिला मजिस्ट्रेट और जिला चुनाव अधिकारियों ने ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारियों (BDOs) से अपने-अपने इलाकों में इन तीन आदिवासी जनजातियों के वोटरों की जानकारी देने को कहा है।

CEO ऑफिस के सूत्रों ने कहा- अगर इन तीनों आदिवासी जनजातियों में से किसी भी वोटर के पास अनुसूचित जनजाति का सर्टिफिकेट नहीं है, तो जिला प्रशासन उसे इमरजेंसी आधार पर सर्टिफिकेट जारी करेगा।

इन लोगों को भी एसआईआर में दी जा रही बड़ी छूट

इससे पहले, इस हफ्ते ECI ने पश्चिम बंगाल में सेक्स वर्कर, ट्रांसजेंडर, और घोषित संन्यासियों के लिए पहचान पत्र की औपचारिकताओं में छूट देने की घोषणा की थी।

सेक्स वर्कर और ट्रांसजेंडर समुदायों के लोगों के लिए ये छूट इसलिए दी जा रही है क्योंकि इस वर्ग के ज़्यादातर लोग सामाजिक रूप से बहिष्कृत हैं और परिवार से अलग हैं।

उनके पास भारतीय नागरिक के रूप में असली वोटर के तौर पर अपनी प्रामाणिकता साबित करने के लिए अपने ओरिजिनल डॉक्यूमेंट नहीं हैं।

बंगाल में चल रहा एसआईआर का दूसरा चरण

बता दें कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के ड्राफ्ट पर आपत्तियों और दावों की सुनवाई चल रही है, जो राज्य में तीन चरणों वाले एसआईआर का दूसरा चरण है। इस प्रक्रिया में, लोग अपने नाम की पुष्टि या हटाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने ट्रांसजेंडर समुदाय और भिक्षुओं के लिए विशेष छूट दी है। ट्रांसजेंडर लोगों के दस्तावेजों में नाम, लुक और लिंग में अंतर होने पर भी उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा, भिक्षुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था है, क्योंकि उनके भिक्षु बनने से पहले और बाद के जीवन के कारण नामों में अंतर होता है। इसलिए उन्हें पहचान पत्र दस्तावेजों के संबंध में यह विशेष छूट भी दी जाएगी।