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‘जतोई करो हमला…’, अमित शाह के दिल्ली लौटते ही ममता की पार्टी एक्टिव, सामने आया BJP-TMC का मास्टरप्लान!

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। टीएमसी ने अभिषेक बनर्जी के साथ अभियान शुरू किया, जबकि भाजपा आंतरिक मतभेद दूर करने में लगी है।

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Mamata Banerjee And Amit Shah

ममता बनर्जी और अमित शाह के साथ भाजपा नेता। (फोटो- X/ mamatabanerjee/bjpwestbengal)

West Bengal Election 2026 पश्चिम बंगाल में इस साल अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। शुक्रवार को दक्षिण 24 परगना जिले के बारूईपुर में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विशाल जनसभा कर चुनावी अभियान की शुरुआत की।

वहीं, भाजपा भी आंतरिक मतभेद को दूर करने की कोशिशों में जुट गई है। गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्य में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष लंबे समय बाद मंच पर दिखे। उधर, कांग्रेस और वामपंथी दलों में अब भी रणनीति बनाने में पीछे ही नजर आ रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी ने अपनी रैली में केंद्र सरकार पर फंड रोकने और मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया। अभिषेक लगातार रैलियां और रोड शो कर रहे हैं।

उनका अभियान 'जतोई करो हमला, आबार जितबे बंगला' (जितना हमला करो, बंगाल फिर जीतेगा) के नारे के साथ चल रहा है।

2021 के चुनाव में टीएमसी ने 294 में से 215 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 77 सीटें मिली थीं। इस बार बनर्जी का दावा है कि पार्टी पिछली जीत से भी आगे जाएगी।

क्या बोले दिलीप घोष?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर कार्यकर्ताओं से आंतरिक मतभेद भुलाकर एकजुट होकर चुनाव लड़ने का आह्वान किया।

इस बैठक के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की सक्रिय राजनीति में वापसी हुई है, जिन्हें लंबे समय से किनारे कर दिया गया था। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि टीएमसी चुनाव में फायदा उठाने के लिए मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दे उठाने पर मजबूर हैं।

ममता के भाई हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद बनवा रहे हैं और वह खुद दुर्गा आंगन बनवा रही हैं। इससे चुनाव जीतने में मदद नहीं मिलेगी।

कांग्रेस और वामपंथी दलों में असमंजस

कांग्रेस और वामपंथी दलों में अब भी गठबंधन को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। 2021 के चुनाव में दोनों दलों ने मिलकर लड़ाई लड़ी थी, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाए थे।

इस बार भी रणनीति को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिससे विपक्षी मतों का बिखराव होने की आशंका जताई जा रही है। टीएमसी जहां सभा से जनाधार और मजबूत कर रही तो वहीं, भाजपा रणनीतिक बैठकों से संगठनात्मक एकता पर जोर दे रही है। कांग्रेस-वामपंथी गठबंधन अब भी दिशा तय नहीं कर पा रहा है।